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रेलवे लाइन के दर्शक ध्यान दें, ट्रेन आ रही है... यहां हर बार होता है कुछ खास, कमेंटेटर का बिल्कुल अलग अंदाज

Wed, 17 Feb 2021 01:12 PM IST
ishwar ashish अनुराग वाजपेई, अमर उजाला, लखनऊ
अनुराग वाजपेई, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 17 Feb 2021 01:12 PM IST
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- फोटो : amar ujala

दर्शक ध्यान दें... जो लोग पटरी पर बैठक कर मैच का आनंद ले रहे हैं वो पटरी छोड़ दें...। ट्रेन आने वाली है... और लगातार सीटी भी बजा रही है...। जल्द करो... ट्रेन काफी नजदीक है...। मचान पर बैठे कमेंटेटर वसीम रजा ने जैसे ही सभी को अलर्ट किया, दर्शक पटरी से दूर खडे़ होकर मैच का आनंद लेने लगते हैं और जैसे ही ट्रेन निकल जाती है फिर पटरियां मैदान के पवेलियन में तब्दील हो जाती है। यह नजारा था इटौंजा में चल रही इंदिरा प्रियदर्शनी क्रिकेट प्रतियोगिता का, जिसमें खेलने के लिए लखनऊ और आसपास के क्रिकेट क्लबों में होड़ लगी रहती है।

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- फोटो : amar ujala

विविधता में एकता लिए इस टूर्नामेंट में हर साल कुछ नया प्रयोग होता है, जो सभी का ध्यान खींचता है। इस साल इटौंजा के बाबा साहब खेल मैदान में प्रतियोगिता चल रही है, जहां मैदान की बाउंड्रीवाल की दीवारों पर कोरोना से बचाव के संदेश लिखे गए हैं। आयोजन सचिव श्रीकांत मिश्रा ने बताया कि हमारा काम केवल क्रिकेट प्रतियोगिता ही कराना नहीं है बल्कि सामाजिक मुद्दों को भी आमजन तक पहुंचाना है। वर्तमान में देश कोरोना महामारी से सफलतापूर्वक जीत रहा है। ऐसे में हम इन संदेशों के माध्यम से आमजन तक जागरूकता फैलाना चाहते हैं।

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- फोटो : amar ujala

कमेंट्रेटर वसीम रजा ने एक भी मैच नहीं किया मिस
अरे भाई, किधर चले जा रहे हो दिखता नहीं बाउंड्री लाइन का चूना लगा हुआ है, बाहर निकलिए। ग्राउंड के एक कोने पर बनी मचान पर बैठे 67 वर्षीय बुजुर्ग वसीम रजा मुस्तैदी से माइक संभालकर कुछ इस अंदाज में कमेंट्री के साथ स्कोरिंग की दोहरी भूमिका निभाते दिखे। वर्ष 1991 में प्रतियोगिता शुरू होने के समय से कमेंट्री कर रहे वसीम ने शायद ही कोई मैच मिस किया हो। आवाज में भले ही उनकी पुरानी वाली खनक नहीं है, लेकिन दर्शक आज भी उनकी कमेंट्री का पूरा लुत्फ उठाते है। वसीम के साथ युवा कमेंट्रेटर राहुल भी रोचक अंदाज में कमेंट्री करते दिखे। अगर दर्शक को किसी काम से मैदान छोड़ना पड़ जाता है तो वे वसीम और राहुल की जुगलबंदी वाली कमेंट्री सुनकर खुद को अपडेट कर लेते है।

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आयोजक श्रीकांत मिश्रा - फोटो : amar ujala

अनोखा रिकॉर्ड होता प्रतियोगिता के नाम
आयोजक श्रीकांत मिश्रा वर्ष 1991 से इस आयोजन की नींव रखी, लेकिन वर्ष 2017 और 2018 में टूर्नामेंट न होने का मलाल उन्हें हमेशा रहेगा। श्रीकांत बताते हैं कि 2016 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने के कारण इस प्रतियोगिता को अर्जुनपुर में कराने का निर्णय लिया गया, लेकिन वहां का माहौल हमें रास नहीं आया। इसके बाद अगले दो सालों में ग्राउंड के करीब से गुजरी रेलवे ट्रैक को बड़ी लाइन बनाने की प्रक्रिया के चलते हमने आयोजन को स्थगित कर दिया। अगर ये तीन साल खराब न होते तो प्रतियोगिता के नाम लगातार 32 संस्करण करवाने का रिकॉर्ड होता।

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- फोटो : amar ujala

टी-20 क्रिकेट फॉर्मेट पर शुरू हुआ आयोजन
वैसे तो टी-20 क्रिकेट आधिकारिक रूप से वर्ष 2003 से अस्तित्व में आया, लेकिन इंदिरा प्रियदर्शिनी क्रिकेट का आरंभ (वर्ष 1991) ही टी-20 फॉर्मेट पर किया गया। ग्राउंड की बात करे तो वर्ष 2016 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने से पहले यहां करीब 50 मीटर की बाउंड्री हुआ करती थी, जो अब सिमटकर 40 मीटर रह गई है।

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