बजट का इंतजार था। इंतजार इसलिए भी कि उम्मीदों की प्याली में नोटबंदी के बाद की परेशानियों के 'कसैले स्वाद' को भुला देगी। नई ताजगी... नया उत्साह होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कोशिशें भी कीं। कम आमदनी वालों को आयकर की छूट की सीमा को तीन लाख कर दिया।
घर खरीदना आसान तो किसी को बड़ी राहत, जानें- बजट पर क्या कहती है जनता
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बजट का महंगाई पर असर नहीं
प्रतिक्रिया - कुसुम का कहना है कि नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार महंगाई कम करने और आमजन को राहत देने के लिए कोई खास कदम उठाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आयकर सीमा में छूट भी ज्यादा नहीं दी गई। जिन योजनाओं की घोषणा की गई वो दूरदर्शी नहीं हैं। ऐसे में इस बजट का तत्काल फायदा किसी को नहीं मिलने वाला है। सरकार को चाहिए था कि मध्यम वर्ग की जरूरतों को समझते हुए कुछ फैसले लिए जाते। इसमें सबसे ज्यादा जरूरत रोजमर्रा के सामान की कीमतों को नियंत्रित किया जाना है।
समूह - गृजेश कुमार पांडेय, कुसुम पांडेय, निकिता
नंबर - 06/10 (बजट को दस में से छह नंबर दिए।)
अब खुद का मकान खरीदना हुआ आसान
प्रतिक्रिया- आरिश का कहना है कि छोटे मकान खरीदने के लिए बजट में काफी कुछ रियायत दी गई है। इससे अब खुद का मकान खरीदना संभव हो जाएगा। अभी तक मकान या फ्लैट खरीदने के बारे में सोचना ही एक बड़ी बात थी। इसकी वजह से घर की कीमतों का आसमान छूना था। अब जब कम कीमत में फ़्लैट या मकान मिल पाएंगे ऐसे में इसके बारे में सोचा जा सकता है। वहीं 24,000 की जगह 60,000 रुपए किराए पर छूट की सीमा आयकर में शामिल होने से भी राहत मिलेगी।
समूह - इनायत हाशमी, आरिश अदीब, परवीन जाफरी, नसरीन।
नंबर - 07/10 (दस में से सात अंक दिए।)
लोन की ईएमआई कम नहीं हुई
प्रतिक्रिया - पेशे से चिकित्सक डॉ. विष्णुदेव का कहना है कि अरुण जेटली का बजट अच्छा है। इसमें उन्होंने सभी का ध्यान रखा गया है। इसके उलट अभी मध्यम वर्ग को कर्ज में छूट दिए जाने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए थे। अगर टैक्स में थोड़ी ज्यादा राहत मिलती। जैसे आयकर की छूट की सीमा को तीन की जगह पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए था। इसके अलावा ब्याज की दरों को कम करने की उम्मीद नोटबंदी के बाद थी। इससे महंगाई से जूझ रहे परिवारों की ईएमआई कम होने से राहत मिलती। केंद्रीय परीक्षाओं के लिए जो घोषणाएं हुई हैं। इन्हें जितना जल्दी सरकार अमल में लाएगी उतना ही बेहतर होगा।
समूह - संध्या देव, डॉ. विष्णु देव, उत्कर्ष देव, विशाखा देव
नंबर - 07/10 (दस में से सात अंक दिए।)
बुनियादी शिक्षा को रखा अछूता
प्रतिक्रिया : बजट में स्किल डवलपमेंट की बात की गई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी शिक्षा को अछूता रखा गया है। भारत की ज्यादातर आबादी गांवों में रहती है, इसलिए शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार की व्यवस्था होनी चाहिए। बजट को औसत कहा जा सकता है। स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप आदि की व्यवस्था हो सकती थी, लेकिन नहीं की गई। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी कोई खास कदम नही उठाए गए हैं। हां, यह कहा जा सकता है कि बजट में बढ़ा-चढ़ाकर वायदे नहीं किए गए हैं। सब कुछ जमीनी स्तर का है।
समूह - सोमोजिता, रीमा, श्रेया, अथोबी
नंबर - 05/10