यूपी के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। उन्हें गृहमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है।
2014 के लोकसभा चुनाव में वह नरेंद्र मोदी की रैलियों के आयोजन की जिम्मेदारी संभालते थे। इसी दौरान प्रदेश के प्रभारी रहे अमित शाह के करीब आए। स्वतंत्र देव सिंह यूपी सरकार में मंत्री रहते हुए भी संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे। कहा जा रहा है कि इसी कारण उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मूलरूप से उरई के रहने वाले स्वतंत्र देव का राजनीतिक सफर उतार चढ़ाव भरा रहा है। एक पत्रकार के रूप में कॅरिअर शुरू करने वाले स्वतंत्र देव ने 2012 में उरई की कालपी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन बुरी तरह हारे।
स्वतंत्र देव भाजपा की युवा इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य रहे हैं। उनकी मेहनत व लगन को देखते हुए उन्हें 2000 में भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था।
भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के संपर्क में आने से उनका कद लगातार बढ़ता गया जिसके बाद उन्हें यूपी का महामंत्री बना दिया गया।
स्वतंत्र देव सिंह 2012 में उरई की कालपी सीट से चुनाव लड़े पर कांग्रेस उम्मीदवार उमा कांति के सामने उनकी जमानत जब्त हो गई। हालांकि, इसके इसके बाद भी वह एमएलसी बने।
सन 2014 उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष लोकसभा चुनाव में उन्हें नरेंद्र मोदी की रैलियों के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
यूपी में भाजपा की सरकार बनने पर उन्हें परिवहन विभाग में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। मंत्री रहते हुए भी वह संगठनात्मक कार्यों में लगातार सक्रिय रहे।
वह पिछड़े वर्ग से आते हैं। यूपी में 12 सीटों पर होने वाले उपचुनाव उनके लिए पहली कड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं। वहीं, विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को फिर से यूपी की सत्ता में लाना उनके लिए कड़ी चुनौती है।