राजधानी लखनऊ के नगराम में इंदिरा नहर में पिकअप गिरने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग घटना स्थल पर जुट गए। तीन बच्चों के शव निकाले जा चुके थे। चारों तरफ कोहराम मचा था। समय बीतता गया और चार अन्य बच्चों का कुछ पता नहीं लगा तो परिवारीजनों व मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे गया। भीड़ के बीच पहुंचे एसडीएम मोहनलालगंज सूर्यकांत त्रिपाठी को उन्होंने घेर लिया और प्रशासन विरोधी नारेबाजी करने लगे।
गम और गुस्से भरे लोगों को ढांढ़स बंधाने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उन पर सरकारी एके 47 तान दी और लाठियां फटकार उन्हें खदेड़ दिया। यहां तक कि एसडीएम भी आपा खो बैठे और एक ग्रामीण को कई थप्पड़ जड़ दिए। इसके बाद ग्रामीण को पुलिस की जीप में लादकर थाने ले गए। एसओ नगराम रमेश चंद्र के मुताबिक, मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। निर्देश पर आगे की कार्रवाई होगी।
गुस्सा लोग बोले- नहर बंद करने में लगाया समय, बचाव कार्य देर से हुआ शुरू
दरअसल गुस्साए ग्रामीण तत्काल नहर बंद करने की मांग कर रहे थे, क्योंकि बचाव कार्य तेज बहाव के चलते प्रभावित हो रहा था। आक्रोशित लोगों का आरोप है कि एक्शन लेने के बजाय प्रशासनिक अधिकारी उन्हें सिर्फ और सिर्फ आश्वासन दे रहे थे। समय बीतता चला जा रहा था। काफी देर बाद नहर बंद की गई और फिर तीन घंटे बाद पानी कम हुआ तो बचाव कार्य शुरू हुआ।
साड़ी फेंक सुहाग बचाया, बेटा गंवाया
हादसे के वक्त आशा देवी पति आशाराम व दो बेटों के साथ पिकअप में थी। वह किसी तरह नहर से बाहर निकली, लेकिन आशाराम व एक बेटा साजन उर्फ गुंजन डूबने लगा। यह देख आशादेवी ने अपनी साड़ी फेंकी, जिसे पकड़कर पति तो बाहर आ गया, लेकिन साजन बह गया। आशा देवी को मलाल रह गया कि उसने सुहाग तो बचा लिया, लेकिन गोद सूनी हो गई। हालांकि, इस सदमे के बाद भी दंपती साथियों को बचाने में जुटा रहा।
पीड़ित परिवारीजनों को मिलेगी मदद
नगराम में हादसे का शिकार बने बच्चों के परिवारीजनों को जिला प्रशासन मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक मदद दिलवाने की कोशिश करेगा। डीएम कौशल राज शर्मा ने बताया कि पीड़ितों को आर्थिक मदद मुहैया कराने की संस्तुति भी शासन को की गई है।