72 एकड़ में फैला एक हजार से अधिक वन्यजीवों वाला लखनऊ जू शहर का एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है। लेकिन आज से 60-70 साल पहले आजादी के समय ये खुली बाउंड्री वाला एक जंगल मात्र था। जहां कुछ प्रमुख बाड़ों के अलावा भी कई खतरनाक वन्यजीव थे।
कभी पंडित नेहरू आए थे लखनऊ का चिड़िया घर, तब के समय ऐसा था नजारा, तस्वीरें
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'जू में लगभग 20 टाइगर, लायन और तेंदुए रहे'
जू से पिछली तीन पीढ़ियों से जुड़े यूपी के लायन-टाइगर स्पेशलिस्ट कीपर मुबारक अली बताते हैं कि जू के सबसे पुराने बाड़ों में भालू बाड़ा है, यह अब टाइगर का बाड़ा है। इसके अलावा 1925 में राजा बलरामपुर का बनवाया बलरामपुर हाउस है, जिसमें बाघ और बब्बर शेर रहा करते थे। दादा बताते थे कि शेरों को नजदीक से देखने प्रधानमंत्री पं. नेहरू भी एक बार यहां पहुंचे थे।
मौजूदा हाथी बाड़े में हाथी के अलावा कंगारू, लोमड़ी बाड़े के करीब के खाली पड़े जगह बाड़े में गैंडा रहा करता था। दर्जन भर से अधिक कंगारू दो रंगों के थे। 50 से 70 के दशक में एक समय ऐसा भी था कि जू में लगभग 20 टाइगर, लायन और तेंदुए रहे।
आज भी जू के खतरनाक बाघ ‘बग्गा’ की टाइगर ट्राफी संग्रहालय म्यूजियम में रखी हुई है। आदमखोर नर बब्बर शेर शेरू की ट्राफी भी मौजूद है। दादा अब्दुल गफूर और पिता मोहर्रम अली बताया करते थे कि जब शेर बाघ दहाड़ते तो उनकी आवाज नरही तक सुनाई देती थी। पहाड़ों पर पाया जाने वाला याक भी कई सालों तक यहां रहा।
पहाड़ी बीबर के लिए लगा था फ्रीजर
जू के पुराने स्टाफ के मुताबिक हुक्कू बाड़े के सामने बड़ा फ्रीजर लगा था। यहां पहाड़ी बर्फीले क्षेत्रों में पाया जाने वाला वन्यजीव बीबर रहा करता था, जो कि बर्फीले क्षेत्रों में पाया जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के दौरे के बाद यहां पांडा भी लाए गए थे।
बर्फ की मशीन भी बीबर (छोटे आकार का भालू सा जीव) के लिये ही थी। मौजूदा डक पांड में करीब दर्जन भर किस्मों के सौ से अधिक बंदरों का वास था। (चिड़िया घर की एक पुरानी तस्वीर।)
10 पैसे का था जू का एंट्री टिकट
किसी जमाने में प्राणि उद्यान अजायबघर का प्रवेश टिकट 10 पैसे का हुआ करता था। 1975-78 के जमाने में लखनऊ ही नहीं दूर-दराज से आने वाले लोग यहां 10 पैसे में सैर सपाटा किया करते थे। उसके बाद इसके किराये में धीरे-धीरे इजाफा होना शुरू हुआ। (लखनऊ के चिड़िया घर में पंडित नेहरू के भ्रमण की एक तस्वीर)
'1983 में जू के संग्रहालय में आया प्रधानमंत्री नेहरू व इंदिरा गांधी का राजहंस हवाई जहाज'
स्टाफ बताता है कि 1985 तक चार आना, आठ आना होते हुए इसका किराया एक रुपये हो चुका था। 1983 में जू के राज्य संग्रहालय परिसर में पूर्व प्रधानमंत्रियों नेहरू और इंदिरा गांधी का राजहंस हवाई जहाज भी आ चुका था।
90 के दशक में इसका किराया वयस्कों के लिए 10 रुपये और अन्य के लिए 5 रुपये हुआ। 2013 तक ये 30 रुपये तक जा पहुंचा। हाल ही में ये बढ़कर 60 रुपये हो चुका है। (लखनऊ के चिड़िया घर में पंडित नेहरू के भ्रमण की एक तस्वीर)