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आग के साथ दो धमाकों के बाद हर तरफ दहशत, अफरातफरी, जिंदगी बचाने की जद्दोजहद, तस्वीरें

Sun, 16 Jul 2017 02:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 16 Jul 2017 02:58 PM IST
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 Pics of fire in trauma center in lucknow

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में शनिवार शाम आग की लपटें और धुआं फैलते ही हर तरफ अफरातफरी मच गई। दहशत के मारे तीमारदार मरीजों को लेकर भागने लगे। कोई स्ट्रेचर खींच रहा था तो कोई मरीजों को गोद में लेकर बाहर की तरफ भाग रहा था। तीमारदारों के मुताबिक आग की लपटों के साथ दो धमाके हुए। माना जा रहा है कि ये धमाके आग का सिलेंडर फटने से हुए।

 Pics of fire in trauma center in lucknow

सीतापुर के आरपी सिंह ने बताया कि उनके परिवार केलोग बाहर खाना पका रहे थे। तभी आग लग गई। जब लोग भागने लगे तो वह बेटे को लेकर भागने की कोशिश की तो स्ट्रेचर नहीं मिला। तो वह गोद में लेकर ही बाहर भागे। बीच रास्ते में कुछ अन्य लोगों ने मदद की तो वह निकल सके।

 Pics of fire in trauma center in lucknow

हर कोई अपनों को ढूंढ रहा था
इस बीच अग्निकांड की खबर शहर में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते नाते-रिश्तेदारों के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बदहवास होकर हर कोई अपनों को ढूंढने में लगा हुआ था। दिनेश ने बताया कि उनका मरीज तीसरे तल पर भर्ती था। शाम का वक्त था तो बाहर चले आए थे। तब तक उनको आग की सूचना मिली तो पैरों तले की जमीन खिसक गई। वह बदहवासी की हालत में तीसरे फ्लोर की ओर भागे।

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 Pics of fire in trauma center in lucknow

चारों तरफ धुआं भर गया था। तीसरे फ्लोर पर जाने के बाद उनका मरीज वहां था ही नहीं। किसी से पूछने पर कोई बता नहीं पा रहा था। अपने साथ के दूसरे लोगों का फोन नहीं लग रहा था। वह भागकर चौथे पर गए तो वहां भी उनका मरीज नहीं मिला। इस दौरान धुएं के कारण उनकी सांस फूलती जा रही थी। तभी उनके एक साथी ने उन्हें फोन पर बताया कि उनकेमरीज को सुरक्षित नीचे पहुंचाया जा चुका है। तब जाकर जान में जान आई।

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 Pics of fire in trauma center in lucknow

सड़क पर इलाज, तीमारदारों की भी तबीयत बिगड़ी
ट्रॉमा सेंटर से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद मरीजों को शताब्दी, लॉरी कॉर्डियोलॉजी, गांधी वार्ड सहित सभी वार्डों में भेजा जाने लगा था। हालांकि इन वार्डों में पहले से ही मरीज थे। इसके कारण सबको जगह नहीं मिल पाई थी। कई मरीजों को वार्डों के बाहर रखकर इलाज किया जाने लगा।

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