केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में शनिवार शाम आग की लपटें और धुआं फैलते ही हर तरफ अफरातफरी मच गई। दहशत के मारे तीमारदार मरीजों को लेकर भागने लगे। कोई स्ट्रेचर खींच रहा था तो कोई मरीजों को गोद में लेकर बाहर की तरफ भाग रहा था। तीमारदारों के मुताबिक आग की लपटों के साथ दो धमाके हुए। माना जा रहा है कि ये धमाके आग का सिलेंडर फटने से हुए।
सीतापुर के आरपी सिंह ने बताया कि उनके परिवार केलोग बाहर खाना पका रहे थे। तभी आग लग गई। जब लोग भागने लगे तो वह बेटे को लेकर भागने की कोशिश की तो स्ट्रेचर नहीं मिला। तो वह गोद में लेकर ही बाहर भागे। बीच रास्ते में कुछ अन्य लोगों ने मदद की तो वह निकल सके।
हर कोई अपनों को ढूंढ रहा था
इस बीच अग्निकांड की खबर शहर में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते नाते-रिश्तेदारों के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बदहवास होकर हर कोई अपनों को ढूंढने में लगा हुआ था। दिनेश ने बताया कि उनका मरीज तीसरे तल पर भर्ती था। शाम का वक्त था तो बाहर चले आए थे। तब तक उनको आग की सूचना मिली तो पैरों तले की जमीन खिसक गई। वह बदहवासी की हालत में तीसरे फ्लोर की ओर भागे।
चारों तरफ धुआं भर गया था। तीसरे फ्लोर पर जाने के बाद उनका मरीज वहां था ही नहीं। किसी से पूछने पर कोई बता नहीं पा रहा था। अपने साथ के दूसरे लोगों का फोन नहीं लग रहा था। वह भागकर चौथे पर गए तो वहां भी उनका मरीज नहीं मिला। इस दौरान धुएं के कारण उनकी सांस फूलती जा रही थी। तभी उनके एक साथी ने उन्हें फोन पर बताया कि उनकेमरीज को सुरक्षित नीचे पहुंचाया जा चुका है। तब जाकर जान में जान आई।
सड़क पर इलाज, तीमारदारों की भी तबीयत बिगड़ी
ट्रॉमा सेंटर से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद मरीजों को शताब्दी, लॉरी कॉर्डियोलॉजी, गांधी वार्ड सहित सभी वार्डों में भेजा जाने लगा था। हालांकि इन वार्डों में पहले से ही मरीज थे। इसके कारण सबको जगह नहीं मिल पाई थी। कई मरीजों को वार्डों के बाहर रखकर इलाज किया जाने लगा।