केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी यूनिट में मरीज की मौत के बाद तीमारदारों ने नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। रेजीडेंट रूम की खिड़की का शीशा तोड़कर डाक्टर के पेट में घोपने की कोशिश की। बीच-बचाव करने में रेजीडेंट के दाएं हाथ की कोहनी में शीशा आरपार कर गया। मारपीट, अभद्रता और हंगामे के बीच डर कर स्टाफ वहां से भाग गया। मरीज-तीमारदारों में अफरातफरी मच गई।
देर रात हुई इस घटना का पता सुबह जब रेजीडेंट डॉक्टरों को चला तो उन्होंने हड़ताल का ऐलान कर इमरजेंसी में इलाज बंद कर दिया। दोपहर दो बजे तक काम पूरी तरह से ठप रहा और इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक काम प्रभावित रहा। जबकि एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी के सात केस टालने पड़े। 12 घंटे तक मरीजों की भर्ती बंद रही। डेढ़ सौ से अधिक गंभीर मरीज लौटाए गए।
मौलवीगंज के अब्दुल रहमान (45) को सीने में दर्द और सांस फूलने की समस्या के बाद परिवारीजन सोमवार देर रात करीब साढ़े बारह बजे केजीएमयू के लॉरी कार्डियोलॉजी पहुंचे। इमरजेंसी में मौजूद डॉ. विकास ने मरीज को देखने के बाद उसकी हालत गंभीर बताते हुए जरूरी कागजी कार्रवाई के बाद आईसीयू लेकर चले गए। (बवाल के बाद तैनात पुलिसकर्मी)
डॉक्टर विकास ने मरीज को आईसीयू में कार्डियक मसाज देने के साथ सीपीआई दिया और ईसीजी जांच कर हालत की जानकारी दी। थोड़ी देर बाद उन्होंने परिवारीजनों को बताया कि हालत बहुत गंभीर है, कुछ जांचें करवानी पड़ेगी। इसके बाद वह दोबारा मरीज के पास पहुंचे और उसको मैनेज करने में जुट गए। करीब 12 बजकर 45 मिनट पर मरीज की मौत हो गई। डॉ. विकास ने परिवारीजनों को इसकी जानकारी दी तो चार लोग आईसीयू में घुसे और शव बाहर लेकर निकल गए। (हमले में घायल हुआ डॉक्टर)
इसके बाद डॉ. विकास फिर से इमरजेंसी कक्ष में आ गए। इसी दौरान करीब 30 से 35 लोग इमरजेंसी यूनिट में गालल गलौज करते हुए घुसे और डॉक्टर विकास को पकड़ लिया। डॉक्टर विकास ने बचने की कोशिश की तो भीड़ में मौजूद कुछ युवकों ने उनपर हमला बोल दिया। वे जान बचाने के लिए इमरजेंसी रेजिडेंट चेंजिंग रूम की ओर दौड़े तो हमलावरों ने उनको दौड़ा कर पकड़ लिया और बुरी तरह मारना पीटना शुरू कर दिया।