मुख्य सचिव डॉ अनूप चंद्र पांडेय के आदेश के बाद लखनऊ में सार्वजनिक स्थानों पर शुक्रवार से पान-मसाला की बिक्री पर रोक लगनी थी लेकिन आदेश बे-असर रहा। केजीएमयू समेत के बड़े सरकारी अस्पतालों में जहां लोगों को धूम्रपान व तंबाकू न खाने के लिए जागरूक किया जाता है वहीं परिसर के चारों तरफ पान-मसाला और सिगरेट की दुकानें सजी हैं। इन दुकानों को हटवाने के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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विधान भवन
- फोटो : अमर उजाला
केजीएमयू में ट्रॉमा सेंटर और शताब्दी अस्पताल के गेट के बीच पान मसाले की स्थायी दुकान है। यहां तीमारदारों के साथ ही चिकित्सक भी पान मसाला और सिगरेट खरीदते और खाते नजर आते हैं। इसी तरह मुख्य गेट और न्यू ओपीडी गेट के आसपास भी पान मसाले की दुकानें हैं। पिछले दिनों चले अभियान के दौरान इन दुकानों को हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन दूसरे दिन ये दुकानें फिर लग गईं। इस संबंध में मीडिया प्रभारी डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि परिसर के अंदर बिक्री पूरी तरह से बंद है। परिसर से बाहर के लिए जिला प्रशासन को कई बार चिट्ठी भेजी जा चुकी है। पुलिस से भी शिकायत की गई है।
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सिविल अस्पताल
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सिविल अस्पताल
अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बाहर पान-मसाला की कई दुकानें वर्षो से चल रही हैं। इन्हें हटाने की जहमत अस्पताल प्रशासन नहीं उठाता है। ऐसे में वहां पर पान-मसाले की गुमटियां लगातार बढ़ती जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई दफा उन्हें हटाया गया मगर वे दोबारा काबिज हो गए।
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विधान भवन
- फोटो : अमर उजाला
विधान भवन के आसपास भी सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद धड़ल्ले से बिक रहे हैं। इन्हें रोकने का जिम्मा उठाने वाले ही यहां धुआं उड़ाते दिखते हैं। गेट नंबर पांच के आसपास कई दुकानें लगी हुई हैं। इन्हें अभी तक हटवाया नहीं जा सका है, जबकि इस गेट से उच्चाधिकारियों के साथ ही जनप्रतिनिधि भी गुजरते हैं।
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झलकारीबाई अस्पताल
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गेट के आसपास पान-मसाला की दुकानें अरसे से लगीं हैं। इन दुकानों को हटाने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई भी पहल नहीं की गई। यहां पर पान मसालों की दुकानों की तादाद बढ़ती जा रही हैं।