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लखनऊ: जाकिर की विचारधारा का केजीएमयू में प्रचार, पीजीआई के प्रोफेसर का भी नाम; एसटीएफ की जांच में कई खुलासे

Sun, 01 Nov 2026 03:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 01 Nov 2026 03:56 AM IST
सार

विश्वविद्यालय में एक लॉबी खुलकर कट्टरपंथी जाकिर नाईक की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रही थी। इसमें डॉ. नसीम खान की पूरी भूमिका रहती थी। वही इसे लीड करते थे।

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Lucknow: Propagation of Zakir’s ideology at KGMU; PGI professor also named
KGMU - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

केजीएमयू में कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार को लेकर भी एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय में एक लॉबी खुलकर कट्टरपंथी जाकिर नाईक की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रही थी। इसमें डॉ. नसीम खान की पूरी भूमिका रहती थी। वही इसे लीड करते थे। वह इंटीग्रल विश्वविद्यालय के फिजियोलॉजी विभाग में तैनात हैं। पहले वह केजीएमयू में थे। 

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उधर, जांच में एसजीपीजीआई के भी एक प्रोफेसर का नाम सामने आया है। ये सभी तथ्य एसटीएफ की जांच में सामने आए हैं। एसटीएफ इनकी भूमिका रिपोर्ट में प्रमुखता से दर्ज की है। एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. नसीम खान पूर्व में केजीएमयू के डेंटल विभाग में कार्यरत थे।
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आरोप है कि उनके प्रभाव में जिम के दूसरे तल को इबादतखाने के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा, जबकि विश्वविद्यालय परिसर में पहले से ही मस्जिद मौजूद थी। यहां इटावा, मैनपुरी और करहल समेत दूसरे स्थानों से मौलाना आकर तकरीर करते थे।  
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जारी रहेगी जांच... सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने कई स्तर पर तफ्तीश की है। इस दौरान तमाम अहम और पुख्ता साक्ष्य जुटाए हैं। उसी आधार पर संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों आदि की भूमिका स्पष्ट की गई है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी मिले हैं। इसलिए जांच एजेंसी उन लोगों की भूमिका की और गहनता से जांच कर रही है, जिनके खिलाफ बेहद संगीन आरोप सही पाए गए हैं। भविष्य में कई लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है। 

दिल्ली ब्लास्ट के बाद डॉ. खालिदा के इंटीग्रल छोड़ने का दावा
जांच से जुड़े दस्तावेज में डॉ. खालिदा नसीम का भी जिक्र है। वह पूर्व में केजीएमयू में आई सर्जन के तौर पर कार्यरत थीं और बाद में इंटीग्रल विश्वविद्यालय से जुड़ी थीं। दस्तावेज में दावा किया गया है कि उनका डॉ. नसीम खान से निकाह हुआ है।


बताया गया है कि डॉ. खालिदा ने बाद में इंटीग्रल विश्वविद्यालय से इस्तीफा दे दिया। अपुष्ट सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि वर्ष 2025 के दिल्ली ब्लास्ट के बाद डॉ. शाहीन समेत अन्य लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय छोड़ दिया। अब सवाल है कि क्या इसका कोई कनेक्शन है?

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