शुक्रवार को हुई हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में एसटीएफ ने एक और खुलासा किया है। एसटीएफ सूत्रों केमुताबिक हत्यारों ने कमलेश तिवारी की हत्या से एक दिन पहले यानी 17 अक्तूबर को रेलबाजार के हैरिसगंज स्थित कान्हा टेलीकॉम शॉप से सिम व मोबाइल सूरत निवासी अशफाक हुसैन की आईडी से खरीदा था।
2 of 5
कमलेश तिवारी हत्याकांड (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
सिम खरीदने के बाद अशफाक साथी संग झकरकटी बस अड्डे पहुंचा। वहां से लखनऊ को रवाना हो गया था। एसटीएफ ने टेलीकॉम शॉप की महिला संचालक पुष्कल पांडेय को हत्या आरोपियों का वीडियो दिखाया, तो उसने सिम व मोबाइल खरीदने वाले को पहचान लिया। पुष्कल से आधे घंटे तक पूछताछ के बाद उसके पास जमा अशफाक की आईडी को कब्जे में ले लिया। इस दौरान एटीएफ ने शॉप के आसपास की दुकानों पर लगे सीसीटीवी फुटेज भी देखे।
3 of 5
कमलेश तिवारी हत्याकांड (फाइल फोटो)
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, वलसाड़ गुजरात से कानपुर आने वाली उद्योग कर्मी एक्सप्रेस से हत्यारोपी घटना के एक दिन पहले 17 अक्तूबर की शाम कानपुर आए थे। ट्रेन शाम करीब 7.45 बजे सेंट्रल स्टेशन पहुंची थी। इसके ठीक 15 मिनट बाद रात 8 बजे हत्यारोपी एक नंबर प्लेटफार्म की एक की तरफ स्टेशन के बाहर निकले और रेलबाजार होकर हैरिसगंज स्थित टेलीकॉम से सिम-मोबाइल खरीदा। वहां से टाटमिल चौराहा होकर झकरकटी पहुंच गए। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि हत्यारे पहले से शहर से परिचित थे, या उनकी मदद के लिए कोई पहले से स्टेशन पर मौजूद था।
4 of 5
कमलेश तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
रात आठ बजे खरीदा गया सिम करीब एक घंटे बाद एक्टिवेट हुआ था। एसटीएफ सूत्रों केअनुसार हत्यारोपियों को यह जानकारी थी कि कानपुर में बाहर की आईडी पर आसानी से सिम मिल जाएगा। लखनऊ में सिम खरीदना उनके लिए मुश्किल भरा होता। एटीएस सूत्रों के मुताबिक कानपुर देहात के गेंदामऊ रूरा निवासी प्रदीप कुमार यादव की मुलाकात हत्यारोपियों से ट्रेन में हुई थी।
5 of 5
कमलेश तिवारी हत्याकांड (फाइल फोटो)
बातचीत के दौरान हत्यारोपियों ने प्रदीप के मोबाइल से किसी से बात भी की थी। कानपुर देहात के रूरा के गेंदामऊ निवासी प्रदीप कुमार यादव से अभी एसटीएफ टीम लखनऊ में पूछताछ कर रही है। रविवार को रूरा थाने की पुलिस प्रदीप के घर में छानबीन करने पहुंची तो वहां ताला लगा मिला। आसपास केलोग भी प्रदीप के परिजनों के बारे में पुलिस को कुछ नहीं बता सके। (इनपुट : कानपुर ब्यूरो)