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ट्रैक्टर चालक की हत्या, मौत के पहले किया था संघर्ष, शव के पास मिला ये सामान
Wed, 25 Sep 2019 06:43 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Wed, 25 Sep 2019 06:43 PM IST
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मृतक बाल गोविंद
- फोटो : amar ujala
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बंथरा के रामदासपुर गांव में सुबह ट्रैक्टर चालक बाल गोविंद (50) की हत्या कर दी गई। हत्यारों ने शव को ट्रैक्टर के पास कुछ दूरी पर फेंक दिया। शव गांव के बाहर सड़क पर खून से लथपथ मिला। कुछ दूरी पर उसका ट्रैक्टर भी था। भाई बालरूप ने हत्या की आशंका जाहिर करते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। बालगोविंद की मौत सिर पर भारी सामान से चोट लगने से हुई । जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम में हुआ है।
हत्या के मामले में जांच करती पुलिस
- फोटो : amar ujala
परिवारीजनों ने बताया कि बालगोविंद सोमवार रात करीब नौ बजे पड़ोसी गांव सादुल्लानगर निवासी सुरेश रावत के साथ सादुल्लानगर चौराहे पर चाय पीते देखा गया। इसके बाद वह घर नहीं आया। मंगलवार सुबह उसका शव गांव के बाहर ओमप्रकाश के खेत के पास कच्ची सड़क पर मिला। पास में उसका ट्रैक्टर भी पड़ा था। राहगीर की सूचना पर पहुंचे परिवारीजनों ने पुलिस को हत्या की जानकारी दी।
हत्या के मामले में जांच करती पुलिस
- फोटो : amar ujala
मौके पर पहुंची पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो सोमवार देर शाम को बालगोविंद सादुल्लानगर निवासी सुरेश रावत के साथ होने की बात सामने आई। प्रभारी निरीक्षक रमेश सिंह रावत ने सुरेश को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस के मुताबिक सुरेश और बालगोविंद चाय पीने के बाद सूर्यदास की कुटिया स्थित सुरेश के घर गये। वहां दोनों ने शराब पी। बालगोविंद ज्यादा नशे में था, जिसके कारण सुरेश खुद ट्रैक्टर चलाकर उसे घर छोड़ने के लिए जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, सुरेश ने पूछताछ में बताया कि ट्रैक्टर अनियंत्रित हो गया, जिससे बाल गोविंद नीचे गिर गया। ट्रैक्टर से गिरते ही उसके कानों से खून निकलने लगा। यह देख सुरेश घबराकर भाग गया।
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हत्या के मामले में जांच करती पुलिस
- फोटो : amar ujala
मौत के पहले किया था संघर्ष
पोस्टमार्टम में सिर पर किसी भारी सामान से चोट के कारण मौत की बात सामने आई। वहीं इस दौरान हत्यारों से बालगोविंद ने संघर्ष किया। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान भी मिले। परिवारीजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि मामले को दबाने में जुटी है।
पोस्टमार्टम में सिर पर किसी भारी सामान से चोट के कारण मौत की बात सामने आई। वहीं इस दौरान हत्यारों से बालगोविंद ने संघर्ष किया। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान भी मिले। परिवारीजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि मामले को दबाने में जुटी है।
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कांच की चूड़ियां
- फोटो : amar ujala
गले नहीं उतर रही पुलिस की थ्योरी
ग्रामीणों की मानें तो अगर बालगोविंद ट्रैक्टर से गिरा था, तो सड़क कच्ची और कीचड़ वाली होने के चलते उसे इतनी गंभीर चोट नहीं लग सकती कि कान से खून आने लगे। ग्रामीणों के मुताबिक, जहां शव मिला। वहीं पास में कांच की चूड़ियाें के टुकड़े मिले। पुलिस ने ग्रामीणों के इस तर्क को भी दरकिनार कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जानकारी देने के बाद भी पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों की मानें तो अगर बालगोविंद ट्रैक्टर से गिरा था, तो सड़क कच्ची और कीचड़ वाली होने के चलते उसे इतनी गंभीर चोट नहीं लग सकती कि कान से खून आने लगे। ग्रामीणों के मुताबिक, जहां शव मिला। वहीं पास में कांच की चूड़ियाें के टुकड़े मिले। पुलिस ने ग्रामीणों के इस तर्क को भी दरकिनार कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जानकारी देने के बाद भी पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया।