हथियारों के शौकीन मुख्तार अंसारी का निशाना अचूक था। उसने अपने बेटे अब्बास अंसारी को पंजाब कनेक्शन का फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय शूटर बनाने में सफलता भी हासिल कर ली थी, हालांकि अनुमति के बिना अधिक संख्या में प्रतिबंधित असलहे खरीदने के मामले में एसटीएफ ने अब्बास पर कानूनी शिकंजा भी कसा गया। पंजाब से मुख्तार को अत्याधुनिक हथियार भी मिलते रहे। मुख्तार ने ही अपने करीबी लखनऊ निवासी जुगनू वालिया को भी पंजाब में पनाह दिलाई थी।
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Mukhtar Ansari
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2004 में मुख्तार पर सेना से चोरी हुई मशीन गन (एलएमजी) खरीदने का आरोप लगा, जिसने सूबे की सियासत में हड़कंप मचा दिया। मुख्तार पर कानूनी शिकंजा कस रहे एसटीएफ के तत्कालीन डिप्टी एसपी शैलेंद्र सिंह को इसका खुलासा करने की कीमत चुकानी पड़ी और अत्याधिक दबाव पड़ने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
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Mukhtar Ansari Death
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इस मामले में मुख्तार पर पोटा लगाया गया था, जो उस दौर का सबसे सख्त कानून था। इस मशीन गन का इस्तेमाल विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के लिए होना था, जिसके लिए मुख्तार एक करोड़ रुपये दिए थे। एसटीएफ ने 25 जनवरी 2004 को वाराणसी के चौबेपुर इलाके में छापा मारकर एलएमजी बेचने आए बाबूलाल यादव और मुन्नर यादव को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एलएमजी और दो सौ कारतूस बरामद हुए थे।
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mukhtar ansari death
- फोटो : अमर उजाला
हार्ट अटैक से माफिया मुख्तार अंसारी की मौत
करीब ढाई साल से बांदा जेल में बंद पूरब के माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर रात हार्ट अटैक (कार्डिया अरेस्ट) से मौत हो गई। मुख्तार को मौत से करीब तीन घंटे पहले ही इलाज के लिए मंडलीय कारागार से मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां नौ डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में जुटी थी। रात करीब साढ़े दस प्रशासन ने मुख्तार की मौत की सूचना सार्वजनिक की। तब तक मुख्तार के परिवार का कोई सदस्य मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा था।
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मुख्तार अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे मुख्तार की जेल में तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी मौतके पर पहुंचे और करीब साढ़े आठ बजे के आसपास उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां दो घंटे तक उसका इलाज चला। उसे आईसीयू से सीसीयू में शिफ्ट किया गया। जहां रात साढ़े दस बजे के आसपास उसकी मौत हो गई।