फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

विश्व परिवार दिवस: खुशियों की चाबी के साथ मिलता है यहां हर दर्द का मरहम

Thu, 16 May 2019 11:08 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 16 May 2019 11:08 AM IST
विज्ञापन
members of joint families shared their experience on international day of families
संयुक्त परिवार - फोटो : अमर उजाला

व्यक्ति के जीवन में अकेलापन बहुत सी बीमारियों का कारण है। डिप्रेशन भी उनमें से एक है। समाज में यह बहुत तेजी से घर बनाता जा रहा है जिसका एक बड़ा कारण है संयुक्त परिवारों का बिखरना। शहरों में तो एकल परिवार की अवधारणा बहुत तेजी से बढ़ी है। व्यक्तिगत निजता की ख्वाहिश में एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं। ...लेकिन एक बात यह भी सच है कि इसके साथ ही व्यक्ति का अकेलापन और असुरक्षा की भावना भी बढ़ती जा रही है। भावनात्मक रूप से कमजोर होते रिश्ते इसके पीछे कारण हैं। जबकि हर व्यक्ति को भावनात्मक रूप से सहारे की जरूरत जरूर महसूस होती है। ऐसे में संयुक्त परिवार सबसे अच्छी भूमिका निभाते हैं। संयुक्त परिवार में खुशियों की चाबी के साथ हर दर्द का मरहम मिल जाता है। मसलन व्यवसाय में नुकसान हुआ। नौकरी में मायूसी हाथ लगी। परीक्षा में फेल हो गए, बीमार हुए या फिर कोई भी मुसीबत आए । संयुक्त परिवार ऐसी ही मानसिक , शारीरिक व आर्थिक संकट में संबल देने की ताकत देता है। संघर्ष का माद्दा पैदा करता है और दोबारा खड़े होने की शक्ति प्रदान करता है। संयुक्त परिवार को चलाना किसी सरकार को चलाने से कम नहीं होता। पक्ष-विपक्ष सबकी सुननी पड़ती है। कभी कड़ाई तो कभी नरमी बरतनी पड़ती है। यहां छोटी-छोटी खुशियां बंटने से बड़ी हो जाती हैं और बड़े से बड़ा गम भी हल्का हो जाता है। बुधवार को इंटरनेशनल-डे ऑफ फैमिलीज है। ऐसे में राजधानी के कुछ संयुक्त परिवारों से अमर उजाला ने की खास बातचीत। पेश है एक रिपोर्ट :


 
members of joint families shared their experience on international day of families
संयुक्त परिवार - फोटो : अमर उजाला

मानसिक व आर्थिक ताकत का आधार संयुक्त परिवार
- जोशी परिवार, पत्रकारपुरम गोमतीनगर
मूलरूप से पौढ़ी गढ़वाल के अरविंद जोशी ने बताया कि संयुक्त परिवार आपको मानसिक रूप से कभी टूटने नहीं देता। डिप्रेशन हावी नहीं होता। उन्होंने बताया कि कभी लगा ही नहीं कि अलग रहना चाहिए। हम भाई तो साथ में रहे हैं। पर, बहुएं दूसरे घरों से आईं और परिवार को संभाला, जिसकी सराहना करनी चाहिए। काम को लेकर कभी झगड़ा नहीं हुआ। हमारा जॉइंट सेलरी अकाउंट है।

पहली पीढ़ी : मां माहेश्वरी जोशी व पिता स्व. सच्चिदानंद जोशी
दूसरी पीढ़ी : बहन यशोदा बहुगुणा व लीला थपलियाल और बड़े भाई शिवचरण जोशी, जोकि आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में मैनेजर हैं। उनकी पत्नी विभूति जोशी। उनसे छोटे भाई नरेंद्र जोशी मिलिट्री डेयरी फॉर्म लखनऊ में सुपरवाइजर हैं और पत्नी शैलजा जोशी। इसके बाद अरविंद जोशी निजी बैंक में सर्विस प्रोवाइडर हैं और उनकी पत्नी रीना जोशी।
तीसरी पीढ़ी : शिवचरण जोशी की बेटी सौम्या जोशी अमरीका में हैं व दूसरी बेटी अनन्या जोशी जयपुरिया में पढ़ती है। नरेंद्र जोशी की बड़ी बेटी श्रेया जोशी इंजीनियर है, छोटी बेटी इति जोशी एमिटी से बीकॉम कर रही है और बेटा प्रत्यक्ष जोशी जयपुरिया में पढ़ता है। अरविंद जोशी बेटा आरव जोशी।

members of joint families shared their experience on international day of families
संयुक्त परिवार - फोटो : अमर उजाला

सरकार चलाने जैसा है संयुक्त परिवार को चलाना
- निगम परिवार, कुर्सी रोड
विशाल निगम इस परिवार की नींव हैं। वह आज भी ईंट भट्ठे पर जाते हैं और नियमित रूप से कर्मचारियों से मिलते व कारोबार पर नजर रखते हैं। वह कहते हैं कि संयुक्त परिवार को चलाना बिल्कुल वैसे ही है, जैसे सरकारें चलाई जाती हैं। सबका ध्यान रखना पड़ता है। पक्ष-विपक्ष, सबकी सुननी पड़ती है और जब समस्याएं मुंह बाए खड़ी होती हैं तो लोगों की उम्मीदें आपसे बंधी होती हैं। लिहाजा जिम्मेदारियों का बंटवारा कर दिया जाता है, ताकि संचालन बेहतर हो सके। इससे बच्चों में जो अपनत्व व आत्मीयता पैदा होती है, वह हमेशा बनी रहती है और उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने में मदद करती है।
पहली पीढ़ी: विशाल निगम व मां उमा देवी।
दूसरी पीढ़ी: निरंकार निगम व पत्नी कुसुम निगम। सुधीर निगम पिता का हाथ बंटाते हैं। पत्नी श्रद्घा निगम हैं। पुनीत निगम व्यवसायी व उनकी पत्नी पूजा निगम।
तीसरी पीढ़ी: बेटी मुस्कान व शगुन हैं। बेटा विराज निगम। सभी बच्चे पढ़ रहे हैं। अवि निगम व बेटी पृशा निगम, प्रज्ज्वल निगम व सात्विक निगम।

विज्ञापन
विज्ञापन
members of joint families shared their experience on international day of families
संयुक्त परिवार - फोटो : अमर उजाला

यहां अकेलेपन केलिए नहीं है जगह
- साहू परिवार

रमेश चंद्र साहू बताते हैं कि संयुक्त परिवार की तासीर ऐसी है, जिसमें अकेलेपन केलिए कोई जगह नहीं है। हां, कई बार दिक्कतें जरूर होती हैं कि परिवार बड़ा होने से शांत मन से बैठने का समय नहीं मिलता। पर, उससे बड़ी चीज यह है कि  मायूसी से निपटने में संयुक्त परिवार बहुत मदद करते हैं। इतना ही नहीं यह मानसिक व आर्थिक रूप से भी सदस्यों को संबल देता है। न्यूक्लियर फैमिली में जहां खर्चे बढ़ते हैं, वहीं संयुक्त परिवार में खर्चे बंट जाते हैं।

पहली पीढ़ी : भोलाराम साहू व फूलकुमारी साहू
दूसरी पीढ़ी: रमेश चंद्र साहू सचिवालय में अनुभाग अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सुरेश कुमार साहू व्यवसायी हैं। महेश चंद्र साहू निजी व्यवसायी हैं। राकेश कुमार साहू, राजेंद्र कुमार साहू।
तीसरी पीढ़ी: नवीन कुमार साहू, आनंद कुमार साहू व उनकी पत्नी स्मिता साहू हैं। सुनील साहू व उनकी पत्नी ऋतु साहू। शिशिर साहू। रक्षित कुमार साहू, स्पर्श साहू, शुभम साहू, ऋषभ साहू इंजीनियर हैं, चिन्मय साहू, प्रद्युमभन साहू, ओजस, तनुजश्री साहू।

विज्ञापन
members of joint families shared their experience on international day of families
संयुक्त परिवार - फोटो : अमर उजाला

छोटी खुशियां हो जाती हैं बड़ी, बड़े गम लगते हैं छोटे
- श्रीवास्तव परिवार, अलीगंज डंडइया

पेशे से शिक्षिका निशि श्रीवास्तव बताती हैं कि संयुक्त परिवार में छोटी-छोटी खुशियां बहुत बड़ी हो जाती हैं और बड़े गम भी छोटे हो जाते हैं। यह सबसे बड़ी ताकत है और जीवन में टूट जाने के बाद भी लोगों को ताकत देता है। संयुक्त परिवार में सब आपस में बंट जाता है। डिप्रेशन जैसी चीज कभी हावी नहीं होती। सुबह केझगड़े शाम तक खत्म हो जाते हैं। हमारे यहां परिवार में सभी बहुत फ्रेंडली हैं।

पहली पीढ़ी: डॉ. वीके श्रीवास्तव पूर्व पशु चिकित्सा अधिकारी हैं। ऊषा श्रीवास्तव, जोकि एनटीटी स्कूल में प्रिंसिपल रही हैं।
दूसरी पीढ़ी: मधुकर श्रीवास्तव सेल्स टैक्स कमिश्नर से सेवानिवृत्त व पत्नी रेनू श्रीवास्तव। संजय श्रीवास्तव टूर ऑपरेटर हैं और उनकी पत्नी निशि श्रीवास्तव बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका हैं। सौरभ श्रीवास्तव। दिवंगत निहार रंजन की पत्नी अलका रंजन व नंद मधुरिमा श्रीवास्तव। अंजनी श्रीवास्तव व उनकी पत्नी प्रीति श्रीवास्तव। अश्विनी श्रीवास्तव व पत्नी मेघना श्रीवास्तव, जोकि पुलिस में हैं। निहार रंजन के भाई तुषार रंजन व पत्नी संगीता रंजन।
तीसरी पीढ़ी : बेटा आशीष श्रीवास्तव बैंक ऑफ बड़ौदा में असिस्टेंट मैनेजर और उनकी पत्नी प्रियंका बैंक में ही कार्यरत हैं। हर्षिता श्रीवास्तव। अभिषेक श्रीवास्तव सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उसकी पत्नी डॉ. इंदु श्रीवास्तव एमिटी नोएडा में प्रोफेसर हैं। संजय की बेटी सुगंधा व स्निग्धा। अलका रंजन की बेटियां अग्रिमा रंजन व श्रेष्ठा रंजन। किसलय व कौस्तुभ। मलय श्रीवास्तव व प्राक्षा, संभव बलराम।
चौथी पीढ़ी: अदम्य श्रीवास्तव व तृषा।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed