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ये पाकिस्तानी आतंकी है या मेरठ का प्रवीण, तस्वीरें आपको भी उलझा देंगी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 16 Jul 2016 03:26 PM IST
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आतंकी या प्रवीण
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ में विशेष न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जिन तीन आतंकियों को पाकिस्तानी जैश ए मोहम्मद का दुर्दांत फिदाइन मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी है, उनमें से एक आबिद को मेरठ कैंट क्षेत्र निवासी प्रवीण कुमार बताया जा रहा है। तस्वीरों में समानता देख आप भी हैरत में पड़ जाएंगें। मेरठ के एक परिवार का दावा है कि ये उनका खोया हुआ बेटा प्रवीण है। जबकि एसटीएफ के मुताबिक ये पाकिस्तानी आतंकी है।
आतंकी या प्रवीण
- फोटो : amar ujala
पाकिस्सतानी आतंकियों को सजा सुनाए जाने की खबर पाकर परिजन 12 जुलाई को लखनऊ जेल गए थे लेकिन उन्हें प्रवीण से मिलने नहीं दिया गया। प्रवीण को अपना भाई बताने वाले पवन और मां महेश देवी का का दावा है कि ये पाकिस्तानी आतंकी नहीं उनका बेटा प्रवीण है और डीएनए की जांच से ये सच्चाई सामने आ जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवीण की मां ने प्रवीण की तस्वीर भी दिखाई जो कथित आतंकी आबिद से हूबहू मिलती है।
आतंकी या प्रवीण
- फोटो : amar ujala
महेशदेवी ने बताया कि 5 मई 2006 को मेरठ पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली पुलिस पूछताछ के लिए प्रवीण को घर से उठाकर ले गई थी। उस समय मेरठ के एसएसपी नवनीत सिकेरा थे। 6 मई को दिल्ली में एक एनकाउंटर में पांच बदमाश मारे जाने की सूचना अखबारों से मिली। इनमें असलम, अयूब, मनोज, संजय और एक अज्ञात शामिल था। उन्हें बताया गया कि पांचवां शख्स उनका बेटा प्रवीण है, लेकिन जब वे दिल्ली पहुंचे तो शिनाख्त में वह बाबू निकला।
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आतंकी या प्रवीण
- फोटो : amar ujala
इस पर दिल्ली पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान प्रवीण मौजूद था, लेकिन भाग गया। महेशदेवी के अनुसार कुछ पुलिस वालों ने बताया कि प्रवीण पुलिस के कब्जे में है। उसे भविष्य में किसी फर्जी मुठभेड़ में मारकर पुलिस अपना गुडवर्क दिखाएगी। प्रवीण पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं है, लेकिन पुलिस ने तब दावा किया था कि वह बदमाश अयूब के साथ काम करता था। पवन ने बताया कि तब वह 21 साल के थे और प्रवीण 27 साल के थे। परिवार में प्रवीण की पत्नी प्रभा व एक बेटा अंकुर है।
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आतंकी या प्रवीण
सबसे हैरानी वाली बात ये है कि खुद आबिद ने जेल में रहने के दौरान अपने साथियों को नहीं बताया कि वह भारतीय है। इस पर एडवोकेट मोहम्मद शुएब का कहना है कि प्रवीण को मई 2006 में ही मेरठ से उठाया गया था और 2007 में मुठभेड़ में गिरफ्तार दिखाया। इस अवधि में उसके साथ ऐसा कुछ किया जा सकता है कि जिससे वह अपनी पहचान भूलने को मजबूर हो जाए। संभव है कि जिंदा रहने की कीमत पर उसने खुद को पाकिस्तानी आतंकी मान लिया हो।