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Lucknow News: वाहनों में लग रहे वीएलटीडी का एमवीआई करेंगे सत्यापन, देंगे प्रमाणपत्र
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वाहनों में लग रहे वीएलटीडी का एमवीआई करेंगे सत्यापन, देंगे प्रमाणपत्र
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चार हजार रुपये की डिवाइस पर वसूले जा रहे 16 हजार
मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों एमवीआई को मिली जांच की जिम्मेदारी, करेंगे सत्यापन
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। वाहनों में लगाए जा रहे व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस(वीएलटीडी) व पैनिक बटन पर मनमानी वसूली की शिकायतें आ रही हैं। चार हजार रुपये की डिवाइसों के लिए 16 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। ऐसे में परिवहन विभाग ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों को जिम्मेदारी साैंपी है। वीएलटीडी के सत्यापन के लिए अब चालकों को वाहन आरटीओ लाना होगा।
दरअसल, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद सभी वाहन मालिकों को वीएलटीडी लगवाना पड़ रहा है। इसके लिए लखनऊ में 15 एजेंसियों को जिम्मेदारी साैंपी गई है। सूत्र बताते हैं कि एजेंसियां डिवाइस के एवज में 16-16 हजार रुपये वसूल रही हैं। जबकि इस डिवाइस की कीमत चार हजार रुपये है। देश के अन्य प्रदेशों में वीएलटीडी लगवाने के लिए इतना ही भुगतान करना पड़ता है। लेकिन लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में एजेंसियां मनमाना भुगतान ले रही है। टैक्सी, कैब व आटो चालकों की इस समस्या की शिकायत आजाद चालक यूनियन व दि इंडियन फेडरेशन आफ एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स की ओर से परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से की गई। यूनियन अध्यक्ष प्रभुदीप सिंह सलूजा ने बताया कि दोनों डिवाइस अन्य राज्यों में चार हजार रुपये में लग रही हैं, जबकि यूपी में 16 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। ऐसा परिवहन विभाग के अफसरों की मिलीभगत के चलते हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग जांच करवाएगा। साथ ही वीएलटीडी की जांच मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों को दी गई है, जो तकनीकी रूप से डिवाइस को जांचेंगे।
एमवीआई के सत्यापन पर मिलेगा प्रमाणपत्र
व्यावसायिक वाहनों में लगने वाले वीएलटीडी का सत्यापन अब मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर करेंगे। इसके लिए वाहनों को आरटीओ-एआरटीओ लाना होगा। एमवीआई तकनीकी रूप से सक्षम अधिकारी हैं। जो अब वाहनों में वीएलटीडी को लेकर पड़ताल करेंगे। वह मनमानी वसूली को लेकर भी वाहन चालकों से पूछताछ करेंगे। डिवाइस ओके पाए जाने पर ही प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
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किराए में संशोधन की भी मांग
एग्रीगेटर पाॅलिसी के तहत पंजीकरण के लिए शुरू कर दिया गया है। लेकिन एप आधारित टैक्सी चालकों की समस्याएं निस्तारित नहीं हो रही हैं। किराया दरों में वर्ष 2023 से संशोधन नहीं हुआ। वर्तमान किराया 14.67 रुपये प्रति किमी है, लेकिन वाहन स्वामी को ईंधन, ईएमआइ, रखरखाव, बीमा आदि खर्चें मिलाकर अनुमानित लागत करीब 19.50 रुपये प्रति किमी आ रही है। ऐसे में किराया दरों का पुनरीक्षण होना चाहिए।
आधिकारिक वर्जन
वीएलटीडी को लेकर आने वाली शिकायतों की जांच के लिए विभाग को निर्दिष्ट किया गया है। साथ ही मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर वीएलटीडी का सत्यापन कर प्रमाणपत्र साैपेंगे।
-दयाशंकर सिंह, परिवहन राज्यमंत्री
मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों एमवीआई को मिली जांच की जिम्मेदारी, करेंगे सत्यापन
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। वाहनों में लगाए जा रहे व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस(वीएलटीडी) व पैनिक बटन पर मनमानी वसूली की शिकायतें आ रही हैं। चार हजार रुपये की डिवाइसों के लिए 16 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। ऐसे में परिवहन विभाग ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों को जिम्मेदारी साैंपी है। वीएलटीडी के सत्यापन के लिए अब चालकों को वाहन आरटीओ लाना होगा।
दरअसल, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद सभी वाहन मालिकों को वीएलटीडी लगवाना पड़ रहा है। इसके लिए लखनऊ में 15 एजेंसियों को जिम्मेदारी साैंपी गई है। सूत्र बताते हैं कि एजेंसियां डिवाइस के एवज में 16-16 हजार रुपये वसूल रही हैं। जबकि इस डिवाइस की कीमत चार हजार रुपये है। देश के अन्य प्रदेशों में वीएलटीडी लगवाने के लिए इतना ही भुगतान करना पड़ता है। लेकिन लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में एजेंसियां मनमाना भुगतान ले रही है। टैक्सी, कैब व आटो चालकों की इस समस्या की शिकायत आजाद चालक यूनियन व दि इंडियन फेडरेशन आफ एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स की ओर से परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से की गई। यूनियन अध्यक्ष प्रभुदीप सिंह सलूजा ने बताया कि दोनों डिवाइस अन्य राज्यों में चार हजार रुपये में लग रही हैं, जबकि यूपी में 16 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। ऐसा परिवहन विभाग के अफसरों की मिलीभगत के चलते हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग जांच करवाएगा। साथ ही वीएलटीडी की जांच मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों को दी गई है, जो तकनीकी रूप से डिवाइस को जांचेंगे।
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एमवीआई के सत्यापन पर मिलेगा प्रमाणपत्र
व्यावसायिक वाहनों में लगने वाले वीएलटीडी का सत्यापन अब मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर करेंगे। इसके लिए वाहनों को आरटीओ-एआरटीओ लाना होगा। एमवीआई तकनीकी रूप से सक्षम अधिकारी हैं। जो अब वाहनों में वीएलटीडी को लेकर पड़ताल करेंगे। वह मनमानी वसूली को लेकर भी वाहन चालकों से पूछताछ करेंगे। डिवाइस ओके पाए जाने पर ही प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
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किराए में संशोधन की भी मांग
एग्रीगेटर पाॅलिसी के तहत पंजीकरण के लिए शुरू कर दिया गया है। लेकिन एप आधारित टैक्सी चालकों की समस्याएं निस्तारित नहीं हो रही हैं। किराया दरों में वर्ष 2023 से संशोधन नहीं हुआ। वर्तमान किराया 14.67 रुपये प्रति किमी है, लेकिन वाहन स्वामी को ईंधन, ईएमआइ, रखरखाव, बीमा आदि खर्चें मिलाकर अनुमानित लागत करीब 19.50 रुपये प्रति किमी आ रही है। ऐसे में किराया दरों का पुनरीक्षण होना चाहिए।
आधिकारिक वर्जन
वीएलटीडी को लेकर आने वाली शिकायतों की जांच के लिए विभाग को निर्दिष्ट किया गया है। साथ ही मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर वीएलटीडी का सत्यापन कर प्रमाणपत्र साैपेंगे।
-दयाशंकर सिंह, परिवहन राज्यमंत्री