पूरे विश्व में अपना अलग स्थान रखने वाली लखनवी तहजीब और मेहमाननवाजी अब पाठ्यक्रम में भी नजर आएगी। लखनऊ विश्वविद्यालय का उर्दू विभाग अवध कल्चर के नाम से नया पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इसमें अवध कल्चर के बारे में पूरी जानकारी होगी। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से लविवि लखनऊ के युवाओं और बाहरी विद्यार्थियों को अपनी पुरानी परंपराओं से अवगत कराएगा। साथ ही, विभाग में उर्दू पत्रकारिता का पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना है।
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lucknow university
- फोटो : amar ujala
अन्य भाषाओं की तरह उर्दू की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। स्नातक और परास्नातक दोनों स्तर पर उर्दू की सीटें मुश्किल से ही भरती हैं। ज्यादातर भाषाओं में दाखिला न होने की मुख्य वजह डिग्री के बाद रोजगार उपलब्ध न होना बताया जाता है। उर्दू लखनऊ की जुबान रही है, लेकिन आज इसमें दाखिले तलाशने पड़ रहे हैं। इसको देखते हुए उर्दू विभाग कुछ नया करने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी विभागीय स्तर पर अवध कल्चर और उर्दू पत्रकारिता नाम से दो नये पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
जल्द ही इसकी बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद विभिन्न समितियों और कार्य परिषद से मंजूरी मिलते ही इसमें अगले सत्र से दाखिले शुरू होंगे। विभागाध्यक्ष प्रो. अब्बास रजा नैयर ने बताया कि अवध कल्चर पाठ्यक्रम में लखनऊ की पुरानी परंपरा और तहजीब को बताया जाएगा। इससे लखनऊ की संस्कृति और विरासत के लुप्त हो रहे पहलुओं को एक बार फिर से प्रासंगिक बनाने की कोशिश होगी।
दूसरा पाठ्यक्रम उर्दू पत्रकारिता का है। लविवि में पत्रकारिता का पाठ्यक्रम है पर इसमें उर्दू पत्रकारिता नहीं है। अलीगढ़ मुस्लिम विवि और जामिया जैसे विवि में उर्दू पत्रकारिता की पढ़ाई होती है। इसको देखते हुए विभाग ने उर्दू पत्रकारिता का पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी शुरू की है।
परास्नातक स्तर पर होंगी उर्दू की तीन शाखाएं
विभागाध्यक्ष प्रो. अब्बास रजा नैयर ने बताया कि उर्दू में इस समय सिर्फ साहित्य की पढ़ाई होती है। अब इसे तीन भागों में बांटने की योजना है। पहली शाखा उर्दू साहित्य होगी, दूसरी उर्दू पत्रकारिता तथा तीसरी अवध कल्चर के नाम से होगी। इसके लिए जल्द ही बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाई जाएगी।