ट्रांसपोर्ट नगर हादसे में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 400 जवानों ने मोर्चा संभाला है। स्नीफर डॉग की मदद ली जा रही है ताकि कोई मलबे में दबा हो तो उसे जल्द से जल्द निकाला जा सके। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद लगातार जारी है। पुलिस, दमकल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं।
एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट अनिल कुमार पाल ने बताया कि उनकी टीम के 90 जवान रेस्क्यू में लगाए गए हैं। इसी तरह से एसडीआरएफ के 30, पुलिस के 110 और दमकल के 70 जवान रेस्क्यू में जुटे हैं। सभी को शिफ्ट वाइज लगाया जा रहा है।
एसडीआरएफ के कमांडेंट डॉ. सतीश ने बताया कि तकनीक का इस्तेमाल कर मलबे में लोगों की तलाश की जा रही है। स्नीफर डॉग को वहां ले जाया जा रहा है। जिस जगह को वो स्मेल से चिन्हित करते हैं वहां पर ड्रिलिंग कर मलबा हटाया जा रहा है।
एक पोकलेन और तीन जेसीबी लगाई गईं
मलबा हटाने के लिए एक पोकलेन लगाई गई है। साथ में तीन जेसीबी भी लगी हैं। नगर निगम की टीमें लगातार काम में लगी हैं। मलबा एक जगह पर ले जाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मलबे में तमाम सामान है। इसलिए उसको सुरक्षित रखा जाएगा। जिसका भी सामान होगा उसे बाद में पहचान करवाने के बाद वापस किया जाएगा।
दीवार में ड्रिलिंग की
जो बिल्डिंग धराशायी हुई है, उससे सटे गोदाम की दीवार में भी ड्रिलिंग की गई। उम्मीद थी कि शायद उसके जरिये भीतर दबे लोगों के बारे में जानकारी मिल सके। लेकिन, कुछ भी पता नहीं चल सका।
करोड़ों का माल बर्बाद हो गया
बिल्डिंग में दवाई, मोबिल ऑयल और गिफ्ट का गोदाम था। करोड़ों रुपये का माल मलबे में दबकर बर्बाद हो गया। जो कमाने के लिए नौकरी कर रहे थे उनमें से आठ की जिंदगी खत्म हो गई। 28 जख्मी हो गए।