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Lucknow : झोपड़ी बनाकर रह रहे थे मजदूर, पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने दो घंटे में निकाला शव, तस्वीरें

Fri, 16 Sep 2022 10:10 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 16 Sep 2022 10:10 PM IST
सार

हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अधिकारियों को तत्काल राहत कार्य करने का निर्देश दिया। लगातार अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत कर रहे थे। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

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Labourer tells the story of Dilkusha colony Lucknow incident.
हादसे में घायल हुआ मजदूर गोलू। - फोटो : amar ujala

लखनऊ में कैंट इलाके के दिलकुशां में सेना के आफिसर्स कालोनी गौर इंक्लेव की दीवार तीन दिन से हो रही बारिश में भरभराकर गिर गई। दीवार के मलबे में दबकर दो परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई। सभी वहीं निर्माणाधीन दीवार के मजदूरी करते थे। हादसा तड़के करीब तीन बजे हुआ। सूचना पर सेना, कमिश्नरेट पुलिस और एसडीआरएफ के अधिकारी कर्मचारी मौके पर पहुंचे। दो घंटे तक लगातार तीनों टीमों ने राहत कार्य जारी रखा। किसी तरह मलबा हटाकर दो को जिंदा निकाला। जिनको इलाज के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया। वहीं मलबे में दबे नौ लोगों के शव बाहर निकाले गये। हादसे में सभी मृतक झांसी और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के रहने वाले हैं।



 

Labourer tells the story of Dilkusha colony Lucknow incident.

गौर इंक्लेव की दीवार मलबे में दबकर मरने वालों में झांसी के पछवारा निवासी पप्पू (40), उसकी पत्नी मान कुंवर देवी (40), बेटा प्रदीप (20), प्रदीप की पत्नी रेशमा (18), प्रदीप की बेटी नैना उर्फ भारती (4), मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ सेमरा निवासी धर्मेंद्र (24), उसकी पत्नी चंदा (20), उसके दो बेटे अजय (4) व नीरज (1) शामिल है। वहीं घायलों में पप्पू का बेटा गोलू और राघवेंद्र शामिल हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया के मुताबिक इंक्लेव में दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है। सभी वहां मजदूरी कर रहे थे। ठेकेदार तुलसीराम ने पास में ही झुग्गी बस्ती बनाकर उनको रहने का इंतजाम कराया था। चार महीने से वहां पर रहते थे। देर शाम को पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराने के बाद पप्पू के भाई चंद्रभान को सुपुर्द किया। सभी नौ शव को लेकर वह झांसी और टीकमगढ़ के लिए रवाना हो गया है।

Labourer tells the story of Dilkusha colony Lucknow incident.
- फोटो : amar ujala

जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार के मुताबिक दीवार के पास दोनों परिवार के लोग झोपड़ी में सोए थे। हादसे की सूचना मिलते ही राहत कार्य शुरू कर दिया गया था। वहीं जेसीपी कानून-व्यवस्था के मुताबिक राहत कार्य सुबह करीब 3.30 बजे से शुरू किया गया। शुरूआती दौर में सेना व कश्मिनरेट पुलिस के कैंट सर्किल के तीन थानों आशियाना इंस्पेक्टर अजय मिश्रा, कैंट, पीजीआई के इंस्पेक्टर बृजेश यादव, डीसीपी पूर्वी प्राची सिंह व एसीपी कैंट अनूप सिंह के नेतृत्व में जुट गये थे। लेकिन आने जाने का रास्ता काफी खराब था। काफी मोटी दीवार होने के कारण राहत कार्य में दिक्कतें आ रही थी। इसके बाद एसडीआरएफ कमांडेंट डॉ. सतीश कुमार को टीम के साथ बुलाया गया। करीब पांच बजे से एसडीआरएफ की टीम ने संयुक्त आपरेशन शुरू किया। जिसके बाद दो घंटे में शव को बाहर निकाला गया।

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Labourer tells the story of Dilkusha colony Lucknow incident.
- फोटो : amar ujala
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अधिकारियों को तत्काल राहत कार्य करने का निर्देश दिया। लगातार अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत कर रहे थे। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया कि सरकार हर संभव मदद करेगी। उधर घायलों को इलाज के लिए उचित इंतजाम करने का निर्देश दिया।
 
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Labourer tells the story of Dilkusha colony Lucknow incident.
- फोटो : amar ujala
हादसे में मृत पप्पू के रिश्तेदार चंद्रभान कानपुर में रहकर मजदूरी करता है। वह रामाबाई में रहता है। उसे पुलिस ने सुबह 7.30 बजे हादसे की सूचना दी। वह किसी तरह पड़ोसियों से कर्ज लेकर लखनऊ पहुंचा। वहीं पड़ोसी से बाइक से लखनऊ छोड़ने की बात कही। किसी तरह लखनऊ पहुंचा। चंद्रभान ने बताया कि चार भाइयों में पप्पू उर्फ गिरजानंद दूसरे नंबर पर था। बड़ा भाई राजकिशोर, उससे छोटा बबलू और चंद्रभान चारो भाई अलग-अलग मजदूरी करते है। पप्पू लखनऊ में और चंद्रभान कानपुर में रहकर मजदूरी करते थे। चंद्रभान ने बताया कि उसके पास चार शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी रुपये नहीं है। वहीं भतीजे सीताराम उर्फ गोलू हादसे में घायल है। उसका इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है।
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