कोरोना और जिंदगी के बीच दीवार बने 'धरती के भगवान', मां बोली- छुट्टी ले लो, पिता ने कहा- डटे रहो
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प्रदेश में कोरोना वायरस के 13 पॉजिटिव केस मिले हैं, जिनमें से दो को केजीएमयू में भर्ती कराया गया है। कोरोना का नाम सुनते ही जहां लोग खौफजदा हो जा रहे हैं वहीं केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम पूरे मनोयोग से उनके इलाज में जुटी है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज में लगी टीम के मुखिया हैं मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. डी. हिमांशु। वह बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान ही मन में कुछ अलग करने की ख्वाहिश थी। इसलिए संक्रामक रोगों से लोगों की जान बचाना जुनून बन गया। कोरोना वायरस की आमद पर पिता को चिंता हुई। पत्नी खुद डॉक्टर हैं तो उन्हें समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। पिता से विस्तार से बात की तो वह समझ गए, लेकिन हर दिन बचाव की गाइडलाइन फॉलो करने का निर्देश देना नहीं भूलते हैं। सुबह हो या शाम जब भी बात होती है तो बचके रहना... कहना नहीं भूलते। पिता के तौर पर उनकी चिंता लाजिमी है। रहा सवाल खुद के बचने का तो मेरा सात साल का बेटा है। उसे अपने दादा के पास रखने की सलाह दी गई है। घर पहुंचते ही उससे लिपटने के बजाय खुद वॉश (कपड़े बदलने और हाथ धुलने) होते हैं। कोशिश होती है कि बेटा दूर रहे। घर जाने पर जूते बाहर निकालते हैं। कुछ ऐसी बातें टीम केसदस्य डॉ. सुधीर कुमार वर्मा एवं अन्य रेजिडेंट डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ भी बताते हैं।
टीम में शामिल डॉ. सुजीत, डॉ. सौरभ, डॉ. विवेक आदि डॉक्टरों ने बताया कि उनके परिवारीजन रोज फोन करते हैं। कुछ लोग तो नाराज भी हैं। मां तो एक ही रट लगाए हैं कि छुट्टी ले लो। उसकी अपनी भावना है, लेकिन पिता समझाते हैं कि यह मौका बार-बार नहीं आता है। चिकित्सक बनने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करो और डटे रहो। इतना जरूर है कि वे इस बात को भी पूछते हैं कि बचने केलिए जो उपकरण होने चाहिए वे हैं या नहीं। टीम में शामिल जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती दौर में उन्हें भी डर लगता था, लेकिन डॉ. डी. हिमांशु और डॉ. सुधीर कुमार के प्रशिक्षण ने मन से भय निकाल दिया है।
नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि डॉक्टर के साथ वे भी मरीजों से सीधे संपर्र्क में आ रहे हैं। उन्हें भी परिवार के लोग दूर रहने की सलाह देते हैं। कई बार परिवारीजनों से झूठ तक बोलना पड़ रहा है। लेकिन कर्तव्य मार्ग से वे पीछे नहीं हटेंगे। वार्ड में जाने पर सुरक्षा किट का प्रयोग करते हैं। विभिन्न बीमारियों से बचने के लिए उनका टीकाकरण भी किया जा चुका है। वे ड्यूटी पर आते ही लगातार हाथ धुलते रहते हैं। घर जाने पर डॉक्टर की ओर से बताई गई बातों का पालन करते हैं। कमरे में जाने से पहले स्वच्छता के सभी मानकों का पालन करके ही अंदर जाते हैं।
कोरोना वायरस के संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों की सेवा में करीब 25 लोगों की टीम लगी हुई है। इन सभी को कोरोना वायरस से बचने का विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें डॉ. डी. हिमांशु, डॉ. सुधीर कुमार वर्मा, डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. सौरभ, डॉ. शिवम, डॉ. विवेक शामिल हैं। इनके अलावा मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों की अलग-अलग दिन के हिसाब से ड्यूटी भी लगाई गई है। संक्रमण नियंत्रण की निगरानी के लिए अस्पताल प्रबंधन विभाग की टीम भी लगी हुई है।