भारतीय रेलवे के इतिहास में एक और कड़ी सुनहरे अक्षरों में जुड़ गई है। रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में देश का पहला स्मार्ट कोच यूपी के रायबरेली जिले से निर्मित होकर निकला। इंटेलिजेंट सेंसर बेस्ड सिस्टम की सहायता से इस कोच को विशेष सुविधाओं से लैस किया गया है। कोच में अगर एसी नहीं काम कर रहा है और पानी की दिक्कत हो तो अलार्म बज उठेगा। यही नहीं, ये कोच सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी स्मार्ट हैं।
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- फोटो : amar ujala
रायबरेली जिले के लालगंज स्थित रेल कोच फैक्ट्री में मेक इन इंडिया के तहत दो स्मार्ट कोचों का निर्माण किया गया है। स्मार्ट कोच एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) प्लेटफॉर्म पर बनाए गए हैं। इसमें एक सेंट्रल कंप्यूटर भी है जो सभी सेंसर्स पर नजर रखता है। लालगंज रेल कोर्च फैक्ट्री के जीएम राजेश अग्रवाल ने बताया कि यहां से दो कोच भारतीय रेल को सौंपे गए हैं। दिल्ली में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने 28 अगस्त को स्मार्ट कोचों का निरीक्षण किया और कहा कि जल्द ही 100 और स्मार्ट कोच देश में रवाना किए जाएंगे। राजेश ने बताया कि दोनों कोचों को नॉर्दर्न रेलवे को सौंपा जाएगा। इसके तहत ये कोच कैफियत एक्सप्रेस में लगाए जाएंगे।
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स्मार्ट कोच की विशेषताएं
- पैसेंजर इंटरफेस के जरिए यात्री सुविधाएं जैसे एयर कंडीश्नर, फायर एक्सटिंग्यूशर समेत अन्य की जानकारी अपडेट करेगा। एसी काम न करने पर तत्काल अलार्म बज उठेगा। वहीं, पानी न आने की भी सूचना रेलवे कर्मचारियों तक पहुंच जाएगी।
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- स्मार्ट कोच में एक वाइब्रेशन पर आधारित हारवेस्टिंग सेंसर लगा है जो ट्रेन के एक्सल पर है। इसका काम है कि यह ट्रेन के चक्के में रह गई कमियों को पहले ही बता देगा। इससे हादसे में निश्चित तौर पर कमी आएगी।
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कोच में यात्री सूचना और कोच कंप्यूटिंग यूनिट है जो औद्योगिक ग्रेड कंप्यूटर के समान है। यह जीएसएम नेटवर्क है जो यात्रियों और रेलवे टीम से संपर्क बनाने में मदद करता है।