गठिया रोगियों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें एक ही छत के नीचे पंचकर्म से लेकर अन्य सभी तरह की सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके लिए राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज टुड़ियागंज में गठिया रोग उपचार केंद्र और शोध लैब बनाई जाएगी। इसमें केरल की तर्ज पर इलाज किया जाएगा। इसमें मरीजों को भर्ती भी किया जाएगा। इसके लिए शासन ने पहले चरण में 38.54 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। चार मंजिला भवन निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है। खास बात यह है कि यहां पूरे यूपी के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों से रेफर होने वाले गठिया मरीजों को भर्ती किया जाएगा।
गठिया के रोगियों को अब एक ही जगह मिलेंगी सभी सुविधाएं, केरल की तर्ज पर होगा इलाज
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अभी नहीं हैं इलाज की सभी सुविधाएं
यूपी में 25 लाख से ज्यादा गठिया के मरीज हैं। एलोपैथ पद्धति से गठिया के इलाज के लिए केजीएमयू और पीजीआई में तो सुपर स्पेशिएलिटी सुविधाएं भी हैं, लेकिन आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सभी सुविधाएं नहीं हैं। केरल में इस बीमारी का आयुर्वेदिक पद्धति से पूरा इलाज किया जाता है। अब टुड़ियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में एक ही छत के नीचे गठिया के इलाज की सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। भवन निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है। चार मंजिला भवन में ओपीडी, वार्ड, पंचकर्म, जांच केंद्र और शोध केंद्र बनेंगे।
...इसलिए जरूरी है आयुर्वेदिक इलाज
कम प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण हो रही जोड़ों की सूजन को गठिया कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे वात दोष माना गया है। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी यानी दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं लंबे समय तक चलती हैं। इससे गुर्दा और लिवर पर बुरा असर पड़ता है। इस रोग में आयुर्वेद को ज्यादा कारगर माना जाता है। इसके तहत पाचन तंत्र सुधारकर शरीर के विषाक्त पदार्थ को बाहर निकाला जाता है। विषाक्त पदार्थ पूरे शरीर में फैल कर कमजोर जोड़ों पर जमा होता है।
पंचकर्म में शरीर से निकालते हैं विषाक्त पदार्थ
गठिया के लिए पंचकर्म उपचार को कारगर माना गया है। इसके लिए मरीज को भर्ती होना पड़ता है। इसमें शरीर को शुद्ध किया जाता है। औषधीय तेल से मालिश होती है। इसमें हर्बल पत्ते पर औषधीय तेल लगाकर पत्ते को गर्म किया जाता है और फिर उसे प्रभावित हिस्से में लगाया जाता है। धीरे-धीरे संबंधित स्थान से विषाक्त पदार्थ निकल जाता है।
मरीज को भर्ती कर किया जाता है इलाज
आमवातारि रस, कोट्टमचुकादि तेल, मुरिवेन्ना आयल, रसनादि के जरिये गठिया का इलाज किया जाता है। इसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक की मौजूदगी जरूरी है। इसी तरह कुछ दवाएं खाली पेट खिलाई जाती हैं। इसी तरह खाने में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर वाली चीजें ज्यादा दी जाती हैं। पानी अधिक से अधिक पिलाया जाता है। कुछ व्यायाम भी कराए जाते हैं। इस वजह से मरीज को भर्ती करने की जरूरत पड़ती है।