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यूपी के ये आईएएस अफसर ला रहे हैं लोगों के जीवन में बदलाव, जानिए इनके बारे में

Thu, 14 Dec 2017 04:07 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 14 Dec 2017 04:07 PM IST
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- फोटो : amar ujala
आम तौर पर अफसरशाही का नाम लेते ही जहां अटकाने, भटकाने और लटकाने वाली कार्य-संस्कृति जेहन में आती है, वहीं कई अधिकारी जनता के जीवन में बदलाव, जनसामान्य की सहूलियतों और सिस्टम की बेहतरी के लिए प्रयासरत हैं। कोई भ्रूण हत्या रोकने की अलख जगाने में कामयाब हुआ है तो कोई प्राइमरी स्कूलों को प्राइवेट कान्वेंट को टक्कर देने लायक तैयार करने की मुहिम में जुटा है। खास बात यह है कि इन अफसरों ने ऐसे कामों के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का ही बेहतर उपयोग किया है। सरकार से अतिरिक्त बजट की मांग नहीं की। बृहस्पतिवार से शुरू हुए आईएएस वीक के मौके पर बदलाव की कोशिश में जुटे ऐसे अफसरों के खास प्रयासों पर एक नजर
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विशाक जी. - फोटो : amar ujala
विशाक जी. : भदोही में कॉन्वेंट को मात दे रहे प्राइमरी स्कूल
कालीन सिटी भदोही के जिलाधिकारी विशाक जी. प्राइमरी स्कूलों के कायाकल्प में जुटे हैं। ग्राम पंचायतों को केंद्र सरकार के 14वें वित्त आयोग और राज्य सरकार के चतुर्थ वित्त आयोग से मिल रहे बजट से इन सरकारी स्कूलों में बदलाव की उनकी मुहिम को हर स्तर पर सराहना मिल रही है। 2011 बैच के आईएएस विशाक पहले चरण में हर ब्लॉक के पांच-पांच विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करा रहे हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव के पास है।

 
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भदोही का प्राइमरी स्कूल - फोटो : amar ujala
यहां सिर्फ प्राइमरी स्कूलों का चेहरा ही नहीं बदला जा रहा, इनमें पढ़ने वाले बच्चों से लेकर उनके माता-पिता तक की व्यावहारिक योग्यता में बदलाव की भी कोशिश हो रही है। यहां बच्चों को सरल भाषा में विज्ञान की जानकारी देने के लिए स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व मैथमेटिक्स) कॉन्सेप्ट पर ज्ञानपुर विकास खंड के मॉडल स्कूल जोरई में एक स्टेम लैब तैयार करने का भी प्रस्ताव है। स्कूली बच्चियों को मेंसुरल हाइजिन मैनेजमेंट की भी जानकारी दी जा रही है। इसमें यूनीसेफ, विद्यालय प्रबंध समिति, मीना मंच, स्कूली शिक्षिकाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जा रहा है।
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दिव्या मित्तल - फोटो : amar ujala
दिव्या मित्तल : पवित्र पेड़ों से लगाया खुले में शौच पर अंकुश
पिछले साल स्वच्छता के सर्वे में गोंडा सबसे निचले पायदान पर था। वहां मुख्य विकास अधिकारी बनकर आईं आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने जिले में खुले में शौच पर अंकुश लगाने पर सबसे ज्यादा फोकस किया। 2013 बैच की आईएएस दिव्या ने जिले के लोगों में पशु-पक्षियों और पेड़ों के  प्रति कायम धार्मिक आस्था को ध्यान में रखकर योजना बनाई। यहां बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं जो नीम, पीपल और बरगद को पूजते हैं।
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गोंडा में बरगद का पौधा लगातीं दिव्या - फोटो : amar ujala
नीम को शीतला देवी, पीपल को ब्रह्मदेव और बरगद को वट सावित्री पूजा से जोड़ा जाता है। दिव्या ने शौचालय बनाने की मुहिम के साथ ही खुले में शौच के लिए ज्यादा प्रयोग किए जाने वाले स्थानों को चिह्नित कराया और वहां साफ-सफाई करवाकर नीम, पीपल और बरगद के पौधे लगवाने शुरू किए। विश्व पर्यावरण दिवस पर हर ब्लॉक की पांच-पांच ग्राम पंचायतों में ये पौधे लगाए गए। दिव्या बताती हैं कि इस पहल के बहुत सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं।
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