विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही सर्द हवाओं के बावजूद राजधानी का सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनावी बिसात पर हार-जीत को लेकर जहां सियासी दलों में किस प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारे पर मंथन होता दिखा, वहीं मतदाता भी सियासी समर में जीत-हार तय करने को योग्यता के आधार पर प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की इच्छा जताता दिखा।
अब भाजपा को हराने वाली रीता खुद भाजपाई, देखें लखनऊ का चुनावी मंथन
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भाजपा को हराने वाली अब खुद भाजपाई
15 साल तक भाजपा के कब्जे में रही कैंट सीट पर वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ने वाली रीता बहुगुणा जोशी ने भाजपा प्रत्याशी को चित कर सफलता पाई थी। चुनाव से पहले विधायकी से इस्तीफा देकर रीता बहुगुणा जोशी अब भाजपा पाले में चले जाने के कारण इस सीट पर भी भाजपा को पुराना कब्जा पाने के लिए पूरी ताकत झोकनी पड़ेगी। सिख, पंजाबी व सिंधी बाहुल्य इस विधानसभा क्षेत्र में अभी तक बसपा, सपा व भाजपा ने कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। सपा की तरफ से घोषित प्रत्याशी अपर्णा यादव भी मुलायम अखिलेश के बीच चल रहे विवाद के कारण चुनाव में हिस्सेदारी करेगी अथवा नहीं, इसे लेकर भी ऊहापोह है।
लखनऊ मध्य
कब्जा वापसी की दिखेगी जंग
वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद बदली भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी की तरफ से रविदास मेहरोत्रा ने जीत हासिल कर कब्जा जमाया था। जमीनी स्तर से जुड़े रविदास को बाद में अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया। बीते समय में लंबे समय तक भाजपा के कब्जे में रही इस सीट पर फिर से जीत हासिल करने को पार्टी द्वारा सशक्त प्रत्याशी उतारे जाने की उम्मीद के चलते इस बार लखनऊ मध्य में चुनावी जंग जोरदार होने की उम्मीद है। मालवीय नगर, ऐशबाग, अमीनाबाद, रकाबगंज, सुभाष नगर, विपुल खंड सहित गोमती नगर के कई इलाके इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं।
सीट बचाए रखना होगा चुनौती
परंपरागत तौर पर भाजपा के प्रभाव क्षेत्र वाली इस सीट पर वर्तमान में भाजपा के गोपाल टंडन उपचुनाव में जीत हासिल कर काबिज है। वर्ष 2012 में इस सीट से भाजपा ने अपने कद्दावर नेता व केंद्र सरकार में मंत्री कलराज मिश्रा को विधायकी चुनाव लड़ाया था। वर्ष 2012 के चुनाव में राजधानी में जबरदस्त प्रदर्शन करने के बाद भी सपा प्रत्याशी इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाया था। इस बार सपा में मची घमासान के बीच डॉ. श्वेता सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है जबकि भाजपा की तरफ से भी गोपाल टंडन को ही फिर से प्रत्याशी बनाने के पूरे आसार माने जा रहे हैं। भाजपा के लिए इस सीट को बचाना बड़ी चुनौती होगा।
सरोजनीनगर
सपा से सीट छीनने की होगी कोशिश
इस सीट पर सपा का वर्चस्व रहा है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की मिलजुली आबादी वाले इस विधानसभा सीट पर बीते चुनाव में सपा की तरफ से शारदा प्रताप शुक्ल ने जीत हासिल की थी। अखिलेश सरकार में कबीना मंत्री बनने के बाद अब फिर से सपा प्रत्याशी घोषित होने पर जहां उनकी प्रतिष्ठा इस बार चुनाव में दांव पर होगी, वहीं बदली स्थिति में भाजपा व बसपा भी यहां से किसी सशक्त को प्रत्याशी बना कर यह सीट चुनाव के दौरान सपा से छीनने की पूरी कोशिश में दिखेंगे। कानपुर रोड एलडीए कॉलोनी, तेलीबाग, आशियाना, रुचि खंड, रवि खंड रतन खंड सहित सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र के कई गांव क्षेत्र इस विधानसभा में आते हैं।