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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya: Ram Mandir may get a CEO today; anticipation builds ahead of the trust meeting scheduled for 3 PM.

अयोध्या: राम मंदिर के सीईओ की रेस में राजेश पांडेय सबसे आगे, परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र का दावा भी मजबूत

Wed, 02 Sep 2026 11:49 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 02 Sep 2026 11:49 AM IST
सार

बुधवार को बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन के साथ रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। दोनों ने रामलला के दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

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Ayodhya: Ram Mandir may get a CEO today; anticipation builds ahead of the trust meeting scheduled for 3 PM.
राम मंदिर के पहले सीईओ के चयन के लिए बनी कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति पर अब निर्णायक घड़ी आ गई है। सीईओ पद के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने एक सितंबर को अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। अब दो सितंबर यानी आज (बुधवार) होने वाली ट्रस्ट की अहम बैठक में अंतिम नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है।

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इस पूरी कवायद के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर उभरकर सामने आया है। राजेश पांडेय की दावेदारी को खास बनाने वाली बात सिर्फ उनका पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के ट्रस्ट के सचिव भी हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का उनका प्रत्यक्ष अनुभव राम मंदिर सीईओ की जिम्मेदारी के लिए उनकी प्रोफाइल को अलग वजन देता है। 
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राजेश पांडेय पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
अंतिम फैसला भले ही ट्रस्ट को करना है, लेकिन सीईओ पद की चर्चाओं में राजेश पांडेय लगातार सबसे आगे बताए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे पांडेय को पुलिस सेवा के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने वाले अधिकारी के तौर पर पहचान मिली। राम मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, वीआईपी और आम श्रद्धालुओं की व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन जैसी कई जिम्मेदारियां सीईओ के सामने होंगी। यही वजह है कि सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र की जटिलताओं को करीब से समझने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास वजन मिल रहा है।
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परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र भी मजबूत नाम
राजेश पांडेय के अलावा बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी परेश सक्सेना का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल है। लंबे पुलिस और प्रशासनिक अनुभव के चलते उन्हें भी मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र भी इस दौड़ में हैं। वह जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी रह चुके हैं और जिला प्रशासन में बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को संभालने का अनुभव रखते हैं। इसके अलावा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में है। हालांकि सर्च कमेटी के अंतिम तीन नामों को लेकर ट्रस्ट की ओर से अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सीईओ की नियुक्ति समेत कई मुद्दों पर होगी चर्चा

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक से पहले रामनगरी में हलचल बढ़ गई है। बैठक में सीईओ की नियुक्ति समेत ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण फैसलों पर बुधवार को मंथन होने की संभावना है। ट्रस्ट की बैठक दोपहर तीन बजे मणिरामदास की छावनी में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होगी। अधिकांश ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी ऑनलाइन बैठक से जुड़ेंगे।

बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन के साथ रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। दोनों ने रामलला के दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। इसके बाद दोनों ट्रस्ट की बैठक की तैयारियों में जुटे।

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजर

बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे में ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक में ही स्पष्ट होगा। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी ट्रस्ट के स्तर पर क्या निर्णय होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

डीड में संशोधन का प्रस्ताव भी अहम
ट्रस्ट की बैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने की सूचना है। विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के भी अयोध्या पहुंचने की जानकारी है। इनके पहुंचने के बाद बैठक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। संघ व विहिप के पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष से भेंट की है, बंद कमरे में वार्ता हुई।

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