जीएसटी लागू होने से पेट्रो पदार्थों के अलावा खाने-पीने और मेडिकल उपकरणों पर लगने वाले टैक्स से आमजन की कमर टूट रही है। ऐसे में मध्य वर्ग को उम्मीद है कि अपने चौथे बजट में वित्तमंत्री अरुण जेटली इस बार आयकर स्लैब को जरूर बढ़ाएंगे। दवाई और पेट्रो पदार्थों पर छूट भी मिलेगी। इस संबंध में राजधानी के पांच अलग- अलग परिवारों ने इस बजट को लेकर अपनी प्राथमिकताएं कुछ इस तरह बताईं।
आमबजट 2018: डीजल-पेट्रोल ने तोड़ी कमर, जानें- जनता को क्या हैं उम्मीदें
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दवाओं व मेडिकल उपकरणों पर जीएसटी हो कम
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे ने बताया कि खाने-पीने की चीजों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगने से आमजन को खाना तक मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं, दवाओं और सर्जिकल उपकरणों पर भी बढ़े टैक्स से गरीब मरीजों के मुश्किल हो रही है। इस बार बजट में केंद्र सरकार को खाद्य पदार्थों व किचन की सभी चीजों पर जीएसटी कम करनी चाहिए। इलाज को लाभ की श्रेणी से अलग रखते हुए दवाओं और सर्जिकल उपकरणों के दाम कम से कम करने चाहिए। जिस तरह पेट्रोल के दाम रोज बढ़ रहे हैं उससे मध्य वर्गीय परिवार की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ रही हैं।
इनकम टैक्स लिमिट बढ़े, महंगाई पर हो नियंत्रण
कारोबारी एवं उद्यमी शिव अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू की तो नौकरी-पेशा के ऊपर टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी आ गई है। इससे नौकरी-पेशा के खर्च में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में केंद्र सरकार को आम बजट में इनकम टैक्स की लिमिट को बढ़ाना चाहिए ताकि नौकरी-पेशा टैक्स को बचा सके। लिमिट तीन लाख तक हो तो नौकरी-पेशा लोगों को ज्यादा राहत मिलेगी। वहीं आए दिन सब्जियों टमाटर, प्याज आदि की मनमानी कीमत बढ़ाने से जनता की जेब कटती है। केंद्र सरकार को इस बजट में इसके नियंत्रण पर प्रावधान करना चाहिए। गृहणी का किचन बजट फेल नहीं होगा।
टुकड़ों में न कम हो जीएसटी
उत्तर रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी शशिकांत शर्मा का कहना है कि सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं। पेट्रोल व डीजल के भाव भी कम नहीं हो रहे हैं। अगर, आम बजट में इन पर अंकुश लगाने की नीतियां बनाई गईं तो यह जनता के हित में होगा। राजाजीपुरम निवासी शशिकांत शर्मा ने बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों की तनख्वाह के हिसाब से खर्च अधिक बढ़ रहा है और बचत घट रही है। इसलिए सरकार को आयकर की सीमा बढ़ानी चाहिए। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी। यह सरकार का उत्तरदायित्व है कि आम लोगों के हितों में नीतियां बनाएं। इस सरकार से बहुत उम्मीद हैं।
आयकर स्लैब में एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे
फैमिली- सीए प्रेम शंकर खंडेलवाल, पत्नी मीना और पुत्र प्रखर
सीए प्रेम शंकर खंडेलवाल ने बताया कि अब तक पांच लाख से 10 लाख, 10 से 20 और 20 से अधिक के टैक्स स्लैब में बदलाव किए जाएंगे। सबसे बड़ा बदलाव पांच लाख तक की आय को कर मुक्त करना, पांच से 10 लाख की आय में 10 प्रतिशत और 10 से 20 लाख में 20 प्रतिशत टैक्स लगना है। इससे अधिक पर 30 प्रतिशत आयकर का नियम किया जाएगा। प्रेम शंकर कहते हैं कि हालांकि यह अपेक्षा काफी बड़ी है, फिर भी एक ओर जीएसटी लगाने के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार की इंडायरेक्ट टैक्स से आय में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में आयकर जैसे डायरेक्ट टैक्स में नागरिकों को राहत मिल सकती है। दूसरी ओर आईआईटी इंजीनियर प्रखर उम्मीद जताते हैं कि यूपी में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए केंद्र सरकार विशेष पैकेज देगी। मीना खंडेलवाल का कहना है रोजमर्रा की चीजें सस्ती होनी चाहिए।