ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ भारत ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में जो धाक जमाई उसमें यूपी के खिलाड़ियों ने चार चांद लगा दिए। पैदल चाल में प्रियंका गोस्वामी तो अन्नू रानी ने जैवलिन थ्रो में पदक जीत सुनहरे भविष्य की उम्मीदों को जगा दिया। उनके पदक का रंग जो भी रहा हो, मगर एथलेटिक्स में देश का रुतबा बढ़ाने में ‘बड़ा’ पदक साबित हुआ। जूडोका विजय यादव और पहलवान दिव्या काकरान ने मुश्किल परिस्थितियों से उबरते हुए पदक के साथ खुद को साबित किया तो पुरुष हॉकी में रजत और महिला हॉकी में देश को कांस्य पदक दिलाने में यूपी के खिलाड़ियों ललित उपाध्याय और वंदना कटारिया ने समां बांध दिया। वहीं क्रिकेट में सोना जीतने से बस कुछ पीछे रह गई टीम में यूपी की खिलाड़ियों दीप्ति शर्मा व मेघना सिंह ने अलग ही छाप छोड़ी।
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10 किमी वॉक में भी स्टार वॉकर का कोई जोड़ नहीं
पैदल चाल में अलग पहचान बनाने वाली प्रियंका गोस्वामी ने राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल 10 किमी वॉक में सभी पूर्वानुमानों को झुठलाते हुए रजत पदक अपने नाम किया। ओलंपिक और एशियन गेम्स में शामिल 20 किमी वॉक ही प्रियंका की मुख्य स्पर्धा है, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में 10 किमी वॉक होने के कारण स्टार एथलीट ने पहली बार इसमें भाग लिया और कमाल का प्रदर्शन करते हुए 43.38.83 मिनट का सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया। बताते चले कि टोक्यो ओलंपिक में भी 20 किमी वॉक रेस के दौरान प्रियंका शुरुआती 12 किमी तक शीर्ष छह स्थान पर रही थी। वहीं से लगा कि कम दूरी वाली वॉक में बेहतर परिणाम सामने आ सकता है और बर्मिंघम में ठीक वैसा ही हुआ। प्रियंका गोस्वामी (मेरठ- 10 किमी वॉक- रजत पदक)
चांदी सी चमकी हॉकी टीम में अपने फारवर्ड का जलवा
टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम का चमकदार प्रदर्शन राष्ट्रमंडल खेलों में भी जारी रहा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में टीम का तालमेल पूरी तरह बिखर गया। लीग दौर में भी इंग्लैंड ने भारत को 4-4 से रोककर तगड़ा झटका दिया था। बावजूद इसके भारतीय टीम खिताबी मुकाबले तक का सफर तय करने में सफल रही। टीम से वाराणसी के अनुभवी खिलाड़ी ललित उपाध्याय ने मिडफील्ड और फारवर्ड के रूप में दोहरी भूमिका से पूरी तरह न्याय किया। छह मैचों में दो गोल करने वाले ललित का प्रदर्शन पूरी प्रतियोगिता के दौरान शानदार रहा। ललित उपाध्याय (वाराणसी- हॉकी- रजत पदक)
पहली बार शामिल महिला क्रिकेट में दिलाया रजत
राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पहली बार महिला क्रिकेट के टी-20 फारमेट को शामिल किया गया। इसमें भारतीय महिलाओं ने अपनी ख्याति के अनुसार शानदार खेल दिखाया और उपविजेता बनने का गौरव हासिल किया। टीम में बतौर हरफनमौला खिलाड़ी शामिल अनुभवी दीप्ति शर्मा ने कुछ एक मौकों पर गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन करते हुए जीत में योगदान दिया। प्रदर्शन के मामले में मेघना थोड़ी पीछे रह गई। हालांकि उन्होंने सभी छह मुकाबलों में टीम के अक्रमण की बागडोर संभाली, लेकिन विकेट चटकाने में उनका प्रदर्शन साधारण ही रहा। क्रिकेट टीम रजत- दीप्ति शर्मा (आगरा) और मेघना सिंह (बिजनौर)
पदक दिलाने वालों की फेहरिस्त में जूडोका भी शामिल
नेशनल चैंपियन बनने के बाद विजय यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदकों की झड़ी लगा दी, लेकिन चार साल के अंतराल पर होने वाले ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में उनकी पदक जीतने की ख्वाहिश अधूरी रही। भारत सरकार की टॉप्स स्कीम में शामिल रहे जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य जीतकर यह कसक दूर कर दी। मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले जूडोका विजय यादव का खेल लखनऊ साई सेंटर में कोच सुषमा अवस्थी की ट्रेनिंग में निखरा। यहां चार साल तक रहकर उन्होंने पहले जूनियर और फिर सीनियर वर्ग में पदक जीतकर चमक बिखेरनी शुरू कर दी। विजय यादव (वाराणसी- जूडो- कांस्य पदक)