आरटीओ कार्यालय में सक्रिय हाईटेक दलालों ने ऑनलाइन व्यवस्था का भी तोड़ निकाल लिया है। वो साइबर कैफे से ऑनलाइन टेस्ट में नकल करवा रहे हैं और बिना ड्राइविंग टेस्ट के परमानेंट लाइसेंस बनवा देते हैं।
केस 1: आधे घंटे में बना दिया लर्निंग लाइसेंस
सुरेंद्रनगर के संदीप ने दस साल पहले दो पहिया वाहन का लाइसेंस बनवाया था। इसे चार पहिया का करवाने के लिए वह आरटीओ कार्यालय पहुंचे। यहां गेट पर ही दलाल अरविंद ने रोक लिया। इस बीच कुछ दलाल और आ गए। 4900 रुपये में बात तय हुई। इसमें लर्निंग के लिए 1400 एडवांस व परमानेंट के लिए 3500 रुपये देने को कहा। संदीप को आधे घंटे में लर्निंग लाइसेंस व्हाट्सएप कर दिया गया।
केस 2: अधिकारी बदलते ही बढ़ जाते हैं रेट
ऑनलाइन व्यवस्था में हाथ तंग होने के चलते अलीगंज निवासी शुभम पांडेय नया डीएल बनवाने के लिए आरटीओ कार्यालय पहुंचे। यहां दलाल सतीश पंजवानी ने उन्हें गेट पर रोक लिया और छह हजार रुपये में लाइसेंस बनवाने का दावा किया। कहा, न तो ऑनलाइन टेस्ट से जूझना पड़ेगा और न ही ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। बस फोटो खिंचवाने आना पड़ेगा। शुभम ने रेट कम करने को कहा तो सतीश ने बताया कि अधिकारी बदलते ही रेट बढ़ जाता है। पहले यह काम 5500 रुपये में हो जाता था। नए अधिकारियों ने रेट बढ़ा दिए हैं।
ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ कार्यालय दलालों का अड्डा बना हुआ है। यहां डीएल बनाने की व्यवस्था भले ही ऑनलाइन कर दी गई है, लेकिन हाईटेक दलालों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। ये उन आवेदकों को शिकार बना रहे हैं, जिनका ऑनलाइन व्यवस्था में हाथ तंग है और जो इस टेस्ट में फेल हो जाते हैं। दलाल आरटीओ ऑफिस के प्रवेश द्वार पर ही आवेदकों को रोककर मोलभाव कर लेते हैं।
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आरटीओ आफिस
- फोटो : amar ujala
लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए अब आरटीओ कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद 15 मिनट का टेस्ट होता है। रोजाना औसतन सौ से डेढ़ सौ ऑनलाइन टेस्ट होते हैं। इसमें ट्रैफिक से जुड़े 15 सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें से कम से कम नौ का सही जवाब देना होता है। इससे कम सही जवाब देने वाले फेल हो जाते हैं। दलाल इन्हें इस टेस्ट में पास कराने की गारंटी लेते हैं। इसके लिए वे आरटीओ कार्यालय के बाहर बने साइबर कैफे से नकल की पूरी व्यवस्था करवाते हैं। वहीं, लर्निंग के बाद परमानेंट लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन स्लॉट लेना पड़ता है। फिर उस दिन सारथी भवन आना पड़ता है, यहां फोटो खिंचती है और फिर ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ता है। इसके लिए प्रतिदिन 396 स्लॉट आवंटित किए जा रहे हैं। दलाल आवेदकों से मोटी रकम लेते हैं, जिससे उन्हें ड्राइविंग टेस्ट तक नहीं देना पड़ता है। इतना ही नहीं दलाल स्पीडपोस्ट से घर तक डीएल पहुंचाने की भी सुविधा देते हैं।
इतनी है सरकारी फीस
लर्निंग लाइसेेंस -- 300 रुपये
परमानेंट लाइसेंस -- 1000 रुपये
दलालों पर लगा रहे हैं अंकुश
एआरटीओ प्रशासन अखिलेश द्विवेदी का कहना है कि आरटीओ कार्यालय की ओर से दलालों पर अंकुश लगाया जा रहा है। उनकी गेट के अंदर एंट्री प्रतिबंधित है। कार्यालय के भीतर दलालों के पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।