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Lucknow News: प्रदेशभर से आए प्रधानाचार्यों ने समस्याओं को प्रमुखता से उठाया
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प्रदेशभर से आए प्रधानाचार्यों ने समस्याओं को प्रमुखता से उठाया
लखनऊ। विद्यालय की व्यवस्था और शैक्षिक गुणवत्ता की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रधानाचार्य खुद सेवा, वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। शुक्रवार को गांधी भवन में आयोजित उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद की प्रांतीय शैक्षिक उन्नयन संगोष्ठी एवं प्रधानाचार्य सम्मेलन में प्रदेशभर से आए प्रधानाचार्यों ने इन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। तदर्थ व कार्यवाहक प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण की मांग पर विशेष जोर रहा।
प्रधानाचार्यों ने हाईस्कूल संस्था प्रधानों की वेतन विसंगतियां दूर करने और इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को त्रिस्तरीय वेतनमान देने की मांग रखी। महंगाई के अनुरूप विद्यालय शुल्क में संशोधन और वाणिज्यिक विद्युत बिल में राहत देने की भी मांग उठी। इसके अलावा सेवा-सुरक्षा, धारा 18 व 21 की पुनर्बहाली और आरटीई व्यय की प्रतिपूर्ति की मांग की गई। परिषद के अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र कुमार राय ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय की धुरी हैं लेकिन उन्हें सेवा-संबंधी, वित्तीय और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महामंत्री डॉ. सुखपाल सिंह तोमर ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की वित्तीय चुनौतियों, पुरानी शुल्क दरों और वेतन विसंगतियों का उल्लेख किया। उन्होंने आरटीई के कारण छात्र निधि पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार की ओर भी ध्यान दिलाया।
प्रधानाचार्यों ने संसाधनों की कमी और ऑनलाइन कार्यों के अतिरिक्त बोझ पर भी चिंता जताई। सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानाचार्यों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और जायज मांगों पर शासन स्तर से सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एमएलसी उमेश द्विवेदी, इंजीनियर अवनीश सिंह, मुकेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल उपस्थित रहे।
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प्रधानाचार्यों ने हाईस्कूल संस्था प्रधानों की वेतन विसंगतियां दूर करने और इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को त्रिस्तरीय वेतनमान देने की मांग रखी। महंगाई के अनुरूप विद्यालय शुल्क में संशोधन और वाणिज्यिक विद्युत बिल में राहत देने की भी मांग उठी। इसके अलावा सेवा-सुरक्षा, धारा 18 व 21 की पुनर्बहाली और आरटीई व्यय की प्रतिपूर्ति की मांग की गई। परिषद के अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र कुमार राय ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय की धुरी हैं लेकिन उन्हें सेवा-संबंधी, वित्तीय और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महामंत्री डॉ. सुखपाल सिंह तोमर ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की वित्तीय चुनौतियों, पुरानी शुल्क दरों और वेतन विसंगतियों का उल्लेख किया। उन्होंने आरटीई के कारण छात्र निधि पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार की ओर भी ध्यान दिलाया।
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प्रधानाचार्यों ने संसाधनों की कमी और ऑनलाइन कार्यों के अतिरिक्त बोझ पर भी चिंता जताई। सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानाचार्यों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और जायज मांगों पर शासन स्तर से सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एमएलसी उमेश द्विवेदी, इंजीनियर अवनीश सिंह, मुकेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल उपस्थित रहे।

प्रदेशभर से आए प्रधानाचार्यों ने समस्याओं को प्रमुखता से उठाया

प्रदेशभर से आए प्रधानाचार्यों ने समस्याओं को प्रमुखता से उठाया

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