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तस्वीरें: मौलाना सादिक की चलती तो नब्बे में ही निपट जाता राम मंदिर विवाद, हिंदुओं को सौंपना चाहते थे जमीन
Wed, 25 Nov 2020 09:15 AM IST
शाहरुख खान
सैयद यासिर रजा, अमर उजाला, लखनऊ
सैयद यासिर रजा, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Nov 2020 09:15 AM IST
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बात 1990 की है। प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। विहिप के आह्वान पर अयोध्या में एकत्र हजारों कारसेवक जब विवादित ढांचे की ओर बढ़े तो सुरक्षा कर्मियों ने गोलियां चला दी। कई कारसेवक मारे गए। इसकी प्रतिक्रिया में देश के कई शहरों में हिंसा भड़क उठी। कई शहरों में कर्फ्यू लगा था।
शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक
- फोटो : अमर उजाला
इसी बीच एक दिन कल्बे सादिक अचानक पहुंच गए बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के नेता और वकील तथा बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी के घर। बोले, अच्छा यही होगा कि जमीन हिंदुओं को सौंपकर अमन-चैन और भाईचारा बचा लिया जाए। हालांकि उनकी इच्छा उस समय पूरी नहीं हो पाई। लेकिन उनकी पहल यह बताने को पर्याप्त है कि वे कितने दूरदर्शी थे।
जफरयाब जिलानी, संयोजक, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी
- फोटो : ani
जीलानी बताते हैं कि मौलाना साहब उस समय तक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष बन चुके थे। उन्होंने मुझसे कहा, सिर्फ शहर ही नहीं देश जल रहा है। क्यों न मस्जिद की जमीन हिंदुओं को दे दी जाए। इससे न सिर्फ अच्छा संदेश जाएगा बल्कि पूरे देश का माहौल बेहतर होगा। जीलानी बताते हैं कि जब मौलाना साहब उनके पास आए थे तो कर्फ्यू लगा हुआ था।
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने आते ही सवाल किया, जो हालात हैं उनमें मुसलमानों की सुरक्षा की क्या व्यवस्था है? इसलिए कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे हालात ठीक हो सकें। जमीन सौंपने को लेकर जीलानी ने उनसे कहा, आप इसके लिए पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष से मिलिए। बोर्ड की बैठक बुलाई जाए उसमें यह प्रस्ताव रखिए। बहुमत की राय बनती है तो हमें कोई एतराज नहीं।
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उस समय बोर्ड के अध्यक्ष अली मियां नदवी थे। वह रायबरेली में थे। कर्फ्यू वहां भी था। लेकिन मौलाना हिंसा से इतना दुखी थे कि वह कर्फ्यू के बीच ही लखनऊ से रायबरेली पहुंचे। नदवी के सामने पूरी बात रखी। नदवी ने अगले ही माह बोर्ड की बैठक बुला ली। हालांकि बैठक में कल्बे सादिक के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी।