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तस्वीरें: जो गलत उसके हमेशा खिलाफ थे डॉ.कल्बे सादिक, मुस्लिम आरक्षण का भी किया था विरोध
Wed, 25 Nov 2020 08:51 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Nov 2020 08:51 AM IST
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक
- फोटो : अमर उजाला
शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का मंगलवार की रात को इंतकाल हो गया। शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक आतंकवाद के खिलाफ मुखर दिखते थे। भले ही मामला पैगंबर साहब का कार्टून बनाने को हो या हाफिज सईद सहित मुस्लिम आतंकियों द्वारा उसे जेल से छुड़ाने के लिए हवाई जहाज के अपहरण की घटना हो।
शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
जिन्होंने कहा था कि हाथ में बंदूक थामकर कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता है। बेगुनाहों के खून से हाथ लाल करने वाले इस्लाम को मानने वाले नहीं हो सकते। वह कहते थे कि किसी भी किस्म के आतंकवाद का वास्ता किसी भी मजहब से नहीं हो सकता।
शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मुस्लिम आरक्षण का विरोध
कांग्रेस सहित कुछ सियासी दलों ने मुस्लिमों को आरक्षण का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने तो घोषणा भी की। कोई और होता तो यह सोचकर चुप हो जाता है कि कहीं उसके समाज के लोग नाराज न हो जाएं। पर, डॉ. सादिक तो अलग ही मिट्टी के बने थे।
कांग्रेस सहित कुछ सियासी दलों ने मुस्लिमों को आरक्षण का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने तो घोषणा भी की। कोई और होता तो यह सोचकर चुप हो जाता है कि कहीं उसके समाज के लोग नाराज न हो जाएं। पर, डॉ. सादिक तो अलग ही मिट्टी के बने थे।
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने मुस्लिम आरक्षण का विरोध कर दिया। कहा, आरक्षण लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होने से रोकता है। उन्होंने सिख समाज की तारीफ की कि इस कौम ने कभी भी आरक्षण नहीं लिया। पर, मेहनत और संघर्ष से कतरा-कतरा हासिल करके तरक्की की दौड़ में सबसे आगे हैं।
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मुसलमानों की खिंचाई में पीछे नहीं
मौलाना मुसलमानों की खिंचाई करने में पीछे नहीं थे। उन्होंने बाराबंकी में मुस्लिम समाज के कार्यक्रम में कहा था कि मुसलमानों से पूछिए कि दीन अर्थात धर्म क्या है? तो वह कहेंगे कि नमाज पढ़ना, रोजे रखना और हज करना। ये सब धार्मिक प्रथाएं हैं, दीन नहीं है। दीन तो वह गुण है जो धार्मिक संस्कार को अदा करने के बाद आता है। मुसलमानों को रिश्वत नहीं लेनी चाहिए। लोगों को दुखी नहीं करना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
मौलाना मुसलमानों की खिंचाई करने में पीछे नहीं थे। उन्होंने बाराबंकी में मुस्लिम समाज के कार्यक्रम में कहा था कि मुसलमानों से पूछिए कि दीन अर्थात धर्म क्या है? तो वह कहेंगे कि नमाज पढ़ना, रोजे रखना और हज करना। ये सब धार्मिक प्रथाएं हैं, दीन नहीं है। दीन तो वह गुण है जो धार्मिक संस्कार को अदा करने के बाद आता है। मुसलमानों को रिश्वत नहीं लेनी चाहिए। लोगों को दुखी नहीं करना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।