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लखनऊ के डीएम को उर्दू सीखने की क्यों जरूरत पड़ गई?

Fri, 18 Sep 2015 11:18 AM IST
Updated Fri, 18 Sep 2015 11:18 AM IST
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लखनऊ के डीएम को उर्दू सीखने की क्यों जरूरत पड़ गई?

dm rajshekar learn urdu in lucknow

गोमती नगर स्थित उर्दू अकादमी परिसर में गुरुवार दोपहर एक बजे से कुछ अलग सा अनूठा नजारा देखने को मिला। जिले के प्रशासनिक व पुलिस विभाग के हाकिम डीएम औक एसएसपी अपने अफसरों की पूरी टीम के साथ क्लास रूम में आम विद्यार्थियों की तरह बैठे थे।

लखनऊ के डीएम को उर्दू सीखने की क्यों जरूरत पड़ गई?

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सभी वहां मौजूद शिक्षक से उर्दू लिखने व पढ़ने का सबक पूरी लगन के साथ सीखते दिखे। प्रशिक्षण का आगाज डीएम राजशेखर ने अलिफ लिख कर किया। करीब एक घंटे तक चली उर्दू की कक्षा के बाद जिलाधिकारी उर्दू में अलिफ लिखना सीख कर काफी खुश नजर आए। इस दौरान अकादमी के शिक्षकों ने विद्यार्थी बने प्रशासिनक व पुलिस के अधिकारियों को उर्दू भाषा लिखने व पढ़ने के गुर सिखाए।

लखनऊ के डीएम को उर्दू सीखने की क्यों जरूरत पड़ गई?

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जिलाधिकारी राज शेखर व एसएसपी राजेश पांडेय ने इसे एक सकारात्मक पहल मानते हुए भरोसा जताया कि इससे सरकारी काम में कुशलता और बढ़ेगी। ज़िलाधिकारी उर्दू का पहला अक्षर अलिफ़  लिख कर 36 साल पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने बताया कि 1989 में सातवीं क्लास में पढ़ने के दौरान उन्होंने गुलबर्ग (कर्नाटक) के जवाहर नवोदय विद्यालय में उर्दू की कुछ पढ़ाई की थी।

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लखनऊ के डीएम को उर्दू सीखने की क्यों जरूरत पड़ गई?

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उन्होंने कहा कि उर्दू हमारे देश की भाषा है और इसे सभी को पढ़ना और लिखना सीखना चाहिये। उर्दू पढ़ने से प्रशासनिक अधिकारियों को बहुत लाभ होगा क्योंकि कलेक्ट्रेट तथा अन्य राजस्व कार्यालयों में पुराने दस्तावेज, अभिलेख और रजिस्ट्रियां अभी भी उर्दू भाषा में लिखी मिलती हैं। ऐसे में अगर अधिकारियों को उर्दू भाषा का ज्ञान होगा तो इन पर निर्णय लेने में आसानी होगी।

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उर्दू की क्लास में पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने बताया कि उन्होंने अपने पिता से पहले ही उर्दू व फारसी भाषा को लिखना-पढ़ना सीख रखा है। उन्होने अकादमी के अध्यक्ष डॉ नवाज़ देवबंदी का विशेषतौर पर शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इससे मौजूद प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को आम सरकारी कामकाज निपटाने में काफी मदद मिलेगी।


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