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तस्वीरें:सोते रहे डॉक्टर,गेट पर हो गया प्रसव

Fri, 19 Jun 2015 09:02 AM IST
Updated Fri, 19 Jun 2015 09:02 AM IST
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तस्वीरें:सोते रहे डॉक्टर,गेट पर हो गया प्रसव

delivery in car because of doctors carelessness

राजधानी के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टॉफ की मनमानी फिर सामने आई है। बुधवार रात तीन बजे प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला के परिवारीजन आशियाना के लोकबंधु अस्पताल के गेट पर खडे़ होकर चिल्लाते रहे, लेकिन नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ नर्स सोते रहे। गर्भवती को समय पर इलाज नहीं मिला और उसने गेट पर कार में ही बच्चे को जन्म दे दिया।


तस्वीरें:सोते रहे डॉक्टर,गेट पर हो गया प्रसव

delivery in car because of doctors carelessness

कानपुर रोड स्थित एलडीए कॉलोनी के प्रदीप शर्मा की पत्नी दिव्या (26) को प्रसव पीड़ा के बाद परिवारीजन बुधवार रात करीब ढाई बजे लोकबंधु अस्पताल ले गए थे। बलरामपुर अस्पताल में स्टाफ नर्स और दिव्या की सास पुष्पा तिवारी ने बताया कि रात को जब महिला अस्पताल के गेट पर कार से पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। चैनल से आवाज दी तो कोई कर्मचारी नहीं आया।

तस्वीरें:सोते रहे डॉक्टर,गेट पर हो गया प्रसव

delivery in car because of doctors carelessness

इस दौरान लॉबी में सोते रहे मरीजों के तीमारदार जग गए। पुष्पा के साथ मौजूद आशीष मौर्या और उनकी पत्नी सोनी ने भी डॉक्टरों और स्टाफ नर्स को आवाज दी लेकिन कोई नहीं आया। इस दौरान दिव्या प्रसव पीड़ा से कार में ही तड़पती रही। तीन बजे दिव्या ने अस्पताल के गेट पर ही कार में बच्चे को जन्म दिया।

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तस्वीरें:सोते रहे डॉक्टर,गेट पर हो गया प्रसव

delivery in car because of doctors carelessness

दिव्या की हालत बिगड़ी तो परिवारीजनों ने चैनल खड़खड़ाते हुए एक बार फिर आवाज दी तो किसी कर्मचारी ने गेट तो खोला, लेकिन इलाज के लिए कोई डॉक्टर या नर्स नहीं आए। इस पर पुष्पा तिवारी ने खुद मोर्चा संभाला और प्रसव के बाद मां-शिशु की जरूरी देखभाल खुद की। इसके बाद मरीज को वार्ड में भर्ती कराया गया। वहीं मामले को दबाने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ ने बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे ही प्रसूता को डिस्चार्ज कर दिया।

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delivery in car because of doctors carelessness

लोकबंधु अस्पताल के एक स्टाफ नर्स की मानें तो रात बारह बजे के बाद इलाज बंद हो जाता है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर से लेकर कर्मचारी कोई न कोई बहानेबाजी करके डफरिन,झलकारीबाई या क्वीन मेरी का रास्ता दिखा देते हैं। अस्पताल सूत्रों की मानें तो रात में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ नर्स कोई केस लेने से पूरी तरह बचते हैं।

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