लॉकडाउन से सबसे अधिक चोट रेस्टोरेंट कारोबारियों को लगी है। लॉकडाउन में यह व्यवसाय पूरी तरह ठप रहा। एक जून से कारोबार शुरू हुआ तो रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। कहने को तो लखनऊ के 3000 रेस्टोरेंट खुल चुके हैं, जिनमें ग्राहकों को बैठकर खाने की पूरी छूट हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के डर से ग्राहक रेस्टोरेंट को देखने भी नहीं जा रहा है। सिर्फ जिनके पास खाना बनाने का इंतजाम नहीं है वही शहर के 20 फीसदी रेस्टोरेंट में पहुंच कर खाना खा रहे हैं, जिससे 15 फीसदी कारोबार हो रहा है। कारोबारियों ने बताया कि 3000 रेस्टोरेंट में से 80 फीसदी ग्राहकों के लिए बंद हैं। अधिकतर रेस्टोरेंट में ऑनलाइन बुकिंग के जरिये खाने की डिलीवरी कराई जा रही है। इसमें सबसे ज्यादा रोटी, दाल, सब्जी बिक रही है, जिससे 25 फीसदी कारोबार चल रहा है। यानी लॉकडाउन से पहले जो कारोबार लगभग दो करोड़ रुपये रोजाना था, वह वर्तमान में 80 लाख के करीब हो गया है, जिसमें मुनाफे का अंश बहुत कम है। सिर्फ लागत निकल रही है।
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अनलॉक-1 में रेस्टोरेंट तो खुले पर आने से डर रहे ग्राहक, ऑनलाइन कारोबार बढ़ा
Fri, 19 Jun 2020 06:39 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 19 Jun 2020 06:39 PM IST
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- फोटो : amar ujala
व्यंजन और रेट
रोटी प्रति - 12
अरहर दाल - 110
सब्जी पनीर - 160
सब्जी मिक्स - 110
भोजन थाली - 160
डोसा एक पीस - 70
इडली दो पीस - 75
चाउमीन - 110
फ्राई राइस - 120
पनीर चिली - 120
मन्चूरियन - 110
*रेट फुल प्लेट
रोटी प्रति - 12
अरहर दाल - 110
सब्जी पनीर - 160
सब्जी मिक्स - 110
भोजन थाली - 160
डोसा एक पीस - 70
इडली दो पीस - 75
चाउमीन - 110
फ्राई राइस - 120
पनीर चिली - 120
मन्चूरियन - 110
*रेट फुल प्लेट
अनूप मेहरोत्रा
- फोटो : amar ujala
रेस्टोरेंट खुले, पर रौनक नहीं
हजरतगंज स्थित रेस्टोरेंट के मालिक लखन आहूजा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद होटल तो खुल गए पर ग्राहकों की रौनक नहीं है। इसीलिए ग्रुप के जितने भी रेस्टोरेंट हैं उनमें ऑनलाइन काम को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे 25 फीसदी कारोबार हो रहा है। जब तक लोग गंज की सैर करने नहीं निकलेंगे, तब तक रेस्टोरेंट का कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ेगा।
एक लाख थी कमाई, 10 हजार बची
भूतनाथ स्थित होटल और रेस्टोरेंट के संचालक अनूप मेहरोत्रा बताते हैं कि शासन ने रेस्टोरेंट को ऑफलाइन यानी ग्राहकों के लिए खोलने का आदेश तो कर दिया, लेकिन अधिकतर कारोबारी रेस्टोरेंट नहीं खोल रहे हैं। क्योंकि खर्च अधिक है और कमाई कम। उन्होंने कहा, पहले रोजाना लाख रुपये कमाई हो रही थी जो अब 10000 ही बची है। ऐसे में रेस्टोरेंट खोलना संभव नहीं।
हजरतगंज स्थित रेस्टोरेंट के मालिक लखन आहूजा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद होटल तो खुल गए पर ग्राहकों की रौनक नहीं है। इसीलिए ग्रुप के जितने भी रेस्टोरेंट हैं उनमें ऑनलाइन काम को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे 25 फीसदी कारोबार हो रहा है। जब तक लोग गंज की सैर करने नहीं निकलेंगे, तब तक रेस्टोरेंट का कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ेगा।
एक लाख थी कमाई, 10 हजार बची
भूतनाथ स्थित होटल और रेस्टोरेंट के संचालक अनूप मेहरोत्रा बताते हैं कि शासन ने रेस्टोरेंट को ऑफलाइन यानी ग्राहकों के लिए खोलने का आदेश तो कर दिया, लेकिन अधिकतर कारोबारी रेस्टोरेंट नहीं खोल रहे हैं। क्योंकि खर्च अधिक है और कमाई कम। उन्होंने कहा, पहले रोजाना लाख रुपये कमाई हो रही थी जो अब 10000 ही बची है। ऐसे में रेस्टोरेंट खोलना संभव नहीं।
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ओपी आहूजा
- फोटो : amar ujala
जोमैटो, स्वीगी का 25% कमीशन
आशियाना के रेस्टोरेंट संचालक और कारोबारी नेता ओपी आहूजा ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग के जरिये रेस्टोरेंट चलाने का भी बहुत फायदा नहीं है। जो आर्डर आते हैं, उसके एवज में जोमैटो और स्वीगी को 25 फीसदी तक कमीशन देना पड़ता है। दरअसल, ग्राहक बुकिंग के बाद भुगतान उन्हीं के खाते में होता है। कमीशन काटकर के बची रकम मेरे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाती है, जिससे कारोबार की गाड़ी चल रही है।
आशियाना के रेस्टोरेंट संचालक और कारोबारी नेता ओपी आहूजा ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग के जरिये रेस्टोरेंट चलाने का भी बहुत फायदा नहीं है। जो आर्डर आते हैं, उसके एवज में जोमैटो और स्वीगी को 25 फीसदी तक कमीशन देना पड़ता है। दरअसल, ग्राहक बुकिंग के बाद भुगतान उन्हीं के खाते में होता है। कमीशन काटकर के बची रकम मेरे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाती है, जिससे कारोबार की गाड़ी चल रही है।
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- फोटो : pixabay
रेस्टोरेंट में बैठने से परहेज
हजरतगंज सहित कई इलाकों में स्थित रेस्टोरेंट के मालिक राहुल खन्ना का कहना कि रेस्टोरेंट तो खुल गए हैं, लेकिन ग्राहक उनमें बैठकर खाना खाने से बच रहे हैं। लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण ग्राहक परिवार को लेकर रेस्टोरेंट में खाना खाने नहीं निकल रहा है। जबकि लॉकडाउन से पहले छोटे-बड़े 3000 रेस्टोरेंट में ग्राहकों के लिए जगह कम पड़ जाती थी।
हजरतगंज सहित कई इलाकों में स्थित रेस्टोरेंट के मालिक राहुल खन्ना का कहना कि रेस्टोरेंट तो खुल गए हैं, लेकिन ग्राहक उनमें बैठकर खाना खाने से बच रहे हैं। लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण ग्राहक परिवार को लेकर रेस्टोरेंट में खाना खाने नहीं निकल रहा है। जबकि लॉकडाउन से पहले छोटे-बड़े 3000 रेस्टोरेंट में ग्राहकों के लिए जगह कम पड़ जाती थी।