क्या आप जानते हैं कि बासी भोजन, सड़ी-गली सब्जियों और उनके छिलके से भी बागवानी हो सकती है। चौंकिए मत, केजीएमयू ने ऐसा कर दिखाया है। यहां बागवानी में अब रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं होता। परिसर के पौधों को वर्मी कंपोस्ट और फूड कंपोस्ट ही दी जाती है। इससे हर माह 15 हजार रुपये की बचत हो रही है। इतना ही नहीं कई डॉक्टर घर के कूड़े को भी केजीएमयू लाते हैं। इनकी बिक्री से मिलने वाले रुपयों से गरीब मरीजों की मदद होती है। केजीएमयू की कैंटीन में रोजाना करीब पांच हजार मरीजों का खाना बनता है। इसके लिए आने वाली सब्जियों के छिलके, छंटाई में निकलने वाली सड़ी-गली सब्जियों एवं मरीजों से बंटने के बाद बचे भोजन को फेंका नहीं जाता है, बल्कि उससे खाद बनाई जाती है। इसके लिए फूड कंपोस्ट मशीन लगाई गई है।
पहलः केजीएमयू बासी भोजन-छिलके से कर रहा ये काम , हर माह बच रहे 15 हजार रुपये
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बिजली से चलने वाली यह मशीन केजीएमयू को दान में मिली है। इसका इस्तेमाल पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण विभाग में किया जा रहा है। प्रो. डॉ. मोहम्मद परवेज खान ने बताया कि छंटाई में दागी व गली सब्जियों को अलग कर दिया जाता है। इन्हें और बचे भोजन को मिलाकर खाद तैयार की जाती है। प्रतिदिन 40 से 50 कि लो खाद तैयार होती है, जिन्हें फूल और फलदार पेड़ों में डाला जाता है। इस खाद से हानिकारक गैस भी नहीं निकलती है। इसी तरह केंचुए की मदद से पत्तियों को सड़ाकर वर्मी कंपोस्ट तैयार की जाती है। परिसर के पेड़-पौधों में भी इसे डाला जाता है।
पहले 20 पौधों पर किया गया प्रयोग
डॉ. खान ने बताया कि पहले विभाग के बगीचे में लगे पौधों पर प्रयोग किया गया। 20 पौधों को सब्जी वाली खाद और 20 को रासायनिक एनपीके दिया गया। सब्जी वाली खाद वाले पौधे ज्यादा खुशहाल दिखने लगे। उनमें फूल भी ज्यादा आए। इसके बाद तय किया कि पूरे परिसर के पौधों को सब्जी वाली खाद दी जाएगी। इसी तरह परिसर में ही पत्तियों व अन्य कूड़े को सड़ाकर केंचुए वाली खाद तैयार की जा रही है। पहले पौधों के लिए हर माह करीब 15 हजार की रासायनिक खाद आती थी, जिसे अब बंद करा दिया गया है। भविष्य में ज्यादा से ज्यादा खाद तैयार करने की योजना है, ताकि अन्य अस्पतालों के पार्क व परिसर में लगे पौधों को भी कंपोस्ट खाद मिल सके।
केजीएमयू के पर्यावरण विभाग ने सभी होटलों, कैंटीनों एवं अन्य अस्पतालों को पत्र भेजा है। इसमें अपील की गई है कि बासी भोजन और सड़ी सब्जियों को फेंकने के बजाय केजीएमयू को दान कर दें, ताकि ज्यादा से ज्यादा खाद तैयार की जा सके। केजीएमयू खुद गाड़ी भेजकर भोजन-सब्जियां उठवा लेगा। तैयार खाद को सरकारी अस्पतालों के पार्क को देने की योजना है।
केजीएमयू को दान में मिलने वाले पुराने कपड़े से झोले तैयार कराए जाते हैं। इसे लोगों को बांटा जाता है, ताकि पॉलीथिन का इस्तेमाल बंद हो सके।