लखनऊ में डॉ. वेद ने बताया कि प्रसव पीड़ा से बचने के लिए आजकल बड़ी संख्या में महिलाएं सिजेरियन प्रसव का सहारा ले रही हैं। सिजेरियन प्रसव न केवल मां के लिए गंभीर है, बल्कि बच्चों के लिए भी खतरनाक है।
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अस्थमा के बारे में जानकारी देते डॉ वेद प्रकाश
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यह जानकारी सोमवार को केजीएमयू के रेस्पिरेटरी विभाग के डॉ. वेद प्रकाश ने विश्व अस्थमा दिवस की पूर्व संध्या पर मीडिया से बातचीत में दी। उन्होंने बताया कई लोगों में अस्थमा की शुरुआत जन्म से ही हो जाती है। ऐसे बच्चे जिनका जन्म सिजेरियन प्रसव से हुआ हो वे आसानी से अस्थमा की चपेट में आ जाते हैं।
सामान्य प्रसव के मुकाबले सिजेरियन प्रसव से हुए शिशुओं में अस्थमा होने की आशंका काफी अधिक मिलती है। डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि अस्थमा के कुल मरीजों में 10 फीसदी बच्चे शामिल हैं।
सिजेरियन से हुए बच्चों में अस्थमा होने की आशंका बहुत बढ़ी हुई होती है। यह तथ्य कई अंतरराष्ट्रीय शोध में प्रमाणित हो चुके हैं।एक दिन का समय भी गर्भस्थ के अंगों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। डॉ. वेद ने बताया कि ऐसे में सिजेरियन प्रसव में अकसर समय से कुछ दिन पूर्व प्रसव करा दिया जाता है।
इससे अगर शिशु कुछ दिन भी कम का होता है तो उसके लंग्स समेत शरीर के कई अंग पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं। ऐसे में उन अंगों के विकास के लिए स्टेरॉयड देना पड़ता है, जिससे आगे जाकर बच्चों में अस्थमा समेत कई अन्य बीमारियाें का खतरा बढ़ जाता है।