अपने खानदान का इकलौता चिराग बीटेक छात्र मृदुल रविवार रात दोस्त की दवा लेने गया था। दुकान के शटर में उतर आए करंट की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। साथ गया छात्र भी घायल हो गया। बेहोशी की हालत में स्थानीय लोगों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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दोस्त के लिए दवा लेने गए युवक की हो गई दर्दनाक मौत, खानदान का था इकलौता चिराग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 04 Jun 2018 03:06 PM IST
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मृदुल (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
रायबरेली के शिवगढ़ निवासी मृदुल अंबालिका इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक इलेक्ट्रिकल का छात्र था। वह मोहनलालगंज में एक हॉस्टल में अभिषेक के साथ रहता था। रविवार दोपहर से ही अभिषेक की तबीयत खराब थी। दवा खत्म हो चुकी थी। मृदुल उसके लिए हॉस्टल के नीचे स्थित भावना मेडिकल स्टोर पर दवा लेने गया।
- फोटो : डेंमो
दुकान के ऊपर से जर्जर तार गए थे, जो हल्की सी हवा चलने पर शटर को छू गए। इस बीच मृदुल का भी हाथ शटर पर गया। उसे अचानक करंट का तेज झटका लगा और वह बेहोश होकर गिर गया। आनन-फानन दुकानदार ने लोगों की मदद से छात्र को सीएचसी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिस बिल्डिंग में वे लोग रहते थे, वह सत्यनारायण द्विवेदी के नाम है। सत्यनारायण ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। बिलि में वे लोग रहते थे, वह सत्यनारायण द्विवेदी के नाम है। सत्यनारायण ने पुलिस को घटना की जानकारी दी।
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प्रभारी निरीक्षक धीरेंद्र प्रताप कुशवाहा ने बताया कि मृदुल के पिता सुनील अवस्थी की बछरावां में कपड़े की दुकान है। घायल साथी ने बताया कि वह इकलौता बेटा था। पिता को हादसे की सूचना दे दी गई थी। मृदुल के साथी अभिषेक को दोपहर से ही बुखार चढ़ना शुरू हो गया था। दवा खाने से बुखार उतरा लेकिन रात को फिर चढ़ने लगा। दवा खत्म हो चुकी थी। जिस बिल्डिंग में दोनों एक साथ रहते थे, उसी में नीचे दवा की दुकान है। पहले से ही उन दोनों से मिलने आए एक अन्य छात्र के साथ वह दवा लेने नीचे गया और करंट की चपेट में आ गया।
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मृदुल (फाइल फोटो)
- फोटो : amarujala
खानदान का इकलौता चिराग था
मृदुल के पिता तीन भाई हैं और विडंबना यह कि अन्य दो भाइयों के कोई औलाद नहीं है। ऐसे में मृुदुल ही एकमात्र चिराग था घर का। घर का इकलौता बच्चा होने के कारण वह सभी का दुलारा भी था और सभी को उससे काफी उम्मीदें थीं। ऐसे में उसकी अप्रत्याशित मौत ने सभी को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया। कोई भी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था और एक दूसरे को संभालने वाला भी कोई नहीं था। उन्हें ढांढस बंधाने में भी पुलिस को काफी मुश्किल हुई।
मृदुल के पिता तीन भाई हैं और विडंबना यह कि अन्य दो भाइयों के कोई औलाद नहीं है। ऐसे में मृुदुल ही एकमात्र चिराग था घर का। घर का इकलौता बच्चा होने के कारण वह सभी का दुलारा भी था और सभी को उससे काफी उम्मीदें थीं। ऐसे में उसकी अप्रत्याशित मौत ने सभी को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया। कोई भी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था और एक दूसरे को संभालने वाला भी कोई नहीं था। उन्हें ढांढस बंधाने में भी पुलिस को काफी मुश्किल हुई।