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Surya Tilak: सूर्य की किरणों ने पांच मिनट तक किया रामलला का तिलक, यहां देखें - अलौकिक तस्वीरें

Wed, 17 Apr 2024 01:12 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: ishwar ashish Updated Wed, 17 Apr 2024 01:12 PM IST
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Ayodhya: Pics of Surya Tilak of Ramlala.
- फोटो : amar ujala

500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद बने भव्य मंदिर में विराजे रामलला का ठीक 12 बजे भगवान सूर्यदेव ने जब अपनी रश्मियों से तिलक किया तो त्रेता युग जीवंत हो उठा। सूर्य की किरणें पांच मिनट  तक रामलला के मस्तक पर विराजीं। इसका साक्षी बनकर भक्त निहाल हो उठे।



राम जन्मोत्सव के पावन मुहूर्त ठीक 12:00 बजे राम मंदिर सहित रामनगरी के हजारों मंदिरों में शंख ध्वनि व घण्टा घड़ियाल की ध्वनि ने यह बता दिया कि रामलला प्रकट हो गए हैं।
Ayodhya: Pics of Surya Tilak of Ramlala.
- फोटो : amar ujala

भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला की स्तुति गूँजने लगीं। भक्त आह्लादित होकर नृत्य करने लगे। इससे पहले भगवान श्री रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। पीतांबरी व सोने के मुकुट में सजे रामलला का दर्शन कर भक्त भावविभोर होते रहे। 

Ayodhya: Pics of Surya Tilak of Ramlala.
- फोटो : amar ujala

रामजन्मभूमि में पुण्य अवसर का साक्षी बनने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल सहित रामनगरी के अन्य संत व सूर्य तिलक की परियोजना को साकार करने वाले वैज्ञानिक भी मौजूद रहे।

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Ayodhya: Pics of Surya Tilak of Ramlala.
- फोटो : amar ujala
इस क्षण को दुनिया भर में फैले करोड़ों लोगों ने देखा और प्रभु श्रीराम का दर्शन किया। जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर मंगलवार को वैज्ञानिकों ने एक बार फिर सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया। कई बार के ट्रायल के बाद समय तय किया गया। मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोग इसे विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय कह रहे हैं। 
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Ayodhya: Pics of Surya Tilak of Ramlala.
- फोटो : doordarshan

वैज्ञानिकों ने बीते 20 वर्षों में अयोध्या के आकाश में सूर्य की गति अध्ययन किया है। सटीक दिशा आदि का निर्धारण करके मंदिर के ऊपरी तल पर रिफ्लेक्टर और लेंस स्थापित किया है। सूर्य रश्मियों को घुमा फिराकर रामलला के ललाट तक पहुंचाया गया। सूर्य की किरणें ऊपरी तल के लेंस पर पड़ीं। उसके बाद तीन लेंस से होती हुई दूसरे तल के मिरर पर पड़ीं। अंत में सूर्य की किरणें रामलला के ललाट पर 75 मिलीमीटर के टीके के रूप में दैदीप्तिमान हुईं। यह समय भी सूर्य की गति और दिशा पर निर्भर है।

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