विश्व हिंदू परिषद की ओर से रविवार को आयोजित होने वाली धर्मसभा के लिए राम भक्तों की भारी भीड़ जुटी हुई है। धनुष-बाण लिए राम की फोटो रथ पर सजाकर भक्तों का आह्वान करते नारे और भजन शहर में गूंज रहे हैं। लेकिन शहरवासियों की दिनचर्या में कोई फर्क नहीं है। यहां के लोगों में न कोई खौफ और न ही कहीं कोई आशंका दिख रही है। आम दिनों की तरह ही रामनगरी अपनी पूरी लय में है। शहर के मुसलमानों को हर गली-मोहल्ले में हिंदू भाइयों का साथ मिल रहा है। यही कारण है कि सभी कारोबारी बेखौफ होकर अपने काम में लगे हुए हैं।
संत-महंतों के लिए खड़ाऊं और पोथी रखने की रेहल बनाने वाले मोहम्मद सलीम की दुकान पर शुक्रवार को भीड़ है, कोई भगवाधारी है तो कोई गृहस्थ। यहीं से हनुमानगढ़ी समेत कई मठ-मंदिरों के संत-धर्माचार्यों की खड़ाऊं जाती है। सरयू घाट से हनुमानगढ़ी के बीच लंबे रोड बाबूबाजार में आसपास सलीम के परिवार की छह दुकानें सजी हैं। सभी का पुश्तैनी काम खड़ाऊं बनाकर बेचना है।
क्या माहौल है... सवाल सुनते ही तपाक से कहते हैं कोई बात नहीं है, बाहर से तो हजारों लोग रोज आते हैं। बस इस बार अंतर सिर्फ इतना है कि सियासी लोग भीड़ लेकर आ रहे हैं। तभी उनकी बेगम बिफर पड़ती हैं... हम तो बहू के साथ जा रहे हैं, आप रहिए...92 भूल गए क्या। सलीम हंसकर जवाब देते हैं कि कोई कहीं नहीं जाएगा, हिंदू भाई साथ हैं। देख नहीं रही हो कितनी अच्छी बिक्री हो रही है, कल-परसों भी दुकान खुलेगी। कमोवेश अयोध्या के हर मुस्लिम परिवार में कुछ ऐसा ही माहौल है।
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
कटरा मोहल्ला से 22 वर्षीय मनीष केशरवानी और 50 वर्षीय मुख्तार अहमद साथ निकलते हैं। हनुमानगढ़ी के पास दंतधावन चौराहा पर मनीष की पान की दुकान है, कहते हैं कि कहीं कोई खौफ नहीं है, न कोई पलायन कर रहा है। दुकान खोलने हम सब तमाम दुकानदार साथ घर से निकले थे। मुख्तार की श्रृंगार हाट में सिलाई की दुकान है, कहते हैं कि बेटा आदिल फैजाबाद साहेबगंज में सिलाई का काम करता है, जबकि नूरी हाईस्कूल पास करके घर पर है। बाहर से आ रही भीड़ से डर जरूर है, जरूरी सामान भी खरीदकर रख लिए हैं, मगर घर नहीं छोड़ेंगे, दुकान भी कल परसों जरूर खुलेगी।
मुस्लिम मोहल्ले की श्रृंगारहाट में 12 लोगों की दुकानें हैं। बेगमपुरा के रहमत महिलाओं को चूड़ी दिखाते हुए कहते हैं कि 1992 जैसी आशंका तो है, मगर उनके पुत्र वसीम समेत टेढ़ी बाजार के इम्तियाज, बेगमपुरा के कलीम व भोले प्रतिकार करते हैं। उनका कहना है माहौल ठीक है। सियासत के चक्कर में हम न दुकान बंद करेंगे, न अयोध्या छोड़ेंगे। हमारे मोहल्ले के हिंदू भाई और संत साथ हैं।
बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार हाजी महबूब के घर टेंपो से कुछ महिलाएं जाती दिखीं तो किसी ने कहा, डर से पलायन हो रहा है, जवाब 12 साल के अनवर ने दिया। कहा शाहजहांपुर में शादी है, वहां जा जा रहे हैं, कोई डर या अफवाह नहीं है। मानस भवन निवासी साकेत पीजी कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की छात्रा हिमांशी पांडेय कहती हैं कि घर वाले बाहर निकलने पर डरा रहे हैं, लेकिन माहौल तो ठीक है।