फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

अमर उजाला Survey: कॅरिअर, शिक्षा और प्रमोशन को लेकर 81 फीसदी युवा सशंकित

Thu, 02 Jun 2022 12:06 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 02 Jun 2022 12:06 PM IST
सार

नौजवानों की मन:स्थिति और सोच की दिशा को समझने के लिए अमर उजाला ने सर्वे किया है। सर्वे में
विद्यार्थी, प्रोफेशनल्स व प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा शामिल किए गए हैं।

विज्ञापन
Amar Ujala survey on youth about their career, education and promotion.
प्रतीकात्मक तस्वीर

वे पूरी ऊर्जा से हर दायित्व निभा रहे हैं। उनमें बहुत कुछ करने का जुनून है और लक्ष्य पर नजर भी। रिजल्ट हो या नौकरी, अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं। हालांकि, इसके बावजूद वे अपने कॅरिअर, शिक्षा, प्रमोशन को लेकर सशंकित रहते हैं। असुरक्षा की भावना उन्हें आज पर फोकस नहीं करने दे रही। यहां बात हो रही है राजधानी के युवाओं की। इनकी मन:स्थिति, सोच किस दिशा में जा रही और वे कितना सोच रहे हैं, इसे लेकर ‘अमर उजाला’ ने 500 युवाओं पर सर्वे किया। इनमें कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और प्रोफेशन से जुड़े 18 से 31 वर्ष तक के नौजवानों में से 81 फीसदी ने माना कि वे जरूरत से ज्यादा सोचते हैं और उनमें हमेशा एक संशय बना रहता है।



मनोरोग विशेषज्ञ कहते हैं कि सोचना गलत नहीं है, लेकिन यदि हमारी सोच नकारात्मकता की ओर जा रही है तो हमें तत्काल सचेत हो जाना चाहिए। यही वह सीमा है, जहां से न्यूरिटिक डिसऑर्डर की शुरुआत होती है। केजीएमयू में ऐसे 60 फीसदी मरीजों का इलाज चल रहा है। सर्वे में युवाओं ने पारिवारिक सपोर्ट सिस्टम को काफी अहम माना।

Amar Ujala survey on youth about their career, education and promotion.

युवाओं की सोच, उनकी मन:स्थिति समझने के लिए पूछे गए सवाल
सवाल-1 : क्या आपका ज्यादा समय सोचते हुए बीतता है?
70.1 फीसदी ने कहा, हां
29.9 फीसदी बोले, न

सवाल-2 : क्या छोटी-छोटी बातें आपको बड़ी लगती हैं?
64.5 फीसदी ने कहा, हां
35.5 फीसदी बोले, नहीं

सवाल-3 : कॅरिअर/शिक्षा/प्रगति को लेकर हमेशा संशय रहता है?
81.1 प्रतिशत ने कहा, हां
18.9 फीसदी ने कहा, नहीं

सवाल-4 : क्या असुरक्षा बोध हावी रहता है?
56.5 फीसदी ने कहा, नहीं
43.5 फीसदी ने कहा, हां

सवाल-5 : क्या परिवार का सपोर्ट न मिलना डर को बढ़ाता है?
58 फीसदी ने कहा, हां
42 फीसदी ने कहा, नहीं

Amar Ujala survey on youth about their career, education and promotion.

नहीं समझ पा रहे, क्या करना है?
सर्वे में शामिल आईआईटी स्टूडेंट आयुष द्विवेदी कहते हैं कि मैं अपने आसपास देख रहा हूं कि स्टूडेंट्स समझ ही नहीं पा रहे उन्हें करना क्या है। पूरा दिन सोचते रहने में ही निकल जाता है, जिससे जो पढ़ाई या तैयारी कर रहे हैं, उस पर भी फोकस नहीं रहता। दोस्तों की इस मानसिक स्थिति का असर बाकी सब पर भी पड़ता है। खुद को अकेला कर लेना, हर वक्त परेशान और निराश रहना, दिशाहीन भटकना जैसी आदतें देखने में आ रही हैं।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Amar Ujala survey on youth about their career, education and promotion.
डॉ. आदर्श त्रिपाठी। - फोटो : amar ujala

विशेषज्ञ बोले-सोचने की दिशा पर रखें नजर
केजीएमयू के मनोरोग विभाग के डॉ. आदर्श त्रिपाठी कहते हैं कि किसी के मन में विचार आना गलत नहीं है। सोचना हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का एक अहम हिस्सा है, लेकिन सोच नकारात्मक दिशा में जा रही है तो इसे नियंत्रित करना होगा। जब असुरक्षा का डर इस कदर बढ़ जाए कि हम उससे वर्तमान पर फोकस न कर पाएं, चिंता बढ़े, भूख और नींद पर असर दिखे और निराशा-अवसाद से घिरते दिखें तो मनोचिकित्सकों की सलाह लें।

विज्ञापन
Amar Ujala survey on youth about their career, education and promotion.

इन बातों का रखें ध्यान
असुरक्षा हमें आने वाले कल के लिए तैयार करती है।
आशंकाएं हमेशा सच साबित नहीं होतीं।
हमें सोच के हर पहलू पर नजर रखनी होगी।
कॅरिअर का एक विकल्प रखना चाहिए।
मन और शरीर के तालमेल के लिए जीवनशैली बदलें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed