लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें सेवानिवृत्त आईपीएस बीबी बख्शी की अलग पहचान है। अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था के साथ उन्होंने जनता में ऐसी बैठ बनाई कि बरसों बाद भी लोग उन्हें याद करते हैं।
ट्रांसगोमती क्षेत्र के पहले अपर पुलिस अधीक्षक बीबी बख्शी ने पदोन्नति के बाद राजधानी में यादगार कप्तानी की थी। क्षेत्राधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने खुद का मुखबिर तंत्र खड़ा किया, जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बनने पर खूब काम आया। अपराधियों के ही नहीं पुलिसकर्मियों के भी क्रियाकलापों की उन्हें खबर रहती थी। दूरदराज के थानों पर तैनात दरोगा-सिपाहियों पर भी उनकी नजर रहती थी।
क्षेत्राधिकारी और थानेदार से पहले उन्हें वारदात की जानकारी हो जाती थी। ऐसे में पुलिसकर्मी हर वक्त चौंकन्ने रहते और पीड़ित को टरकाने की हिम्मत नहीं होती थी। बड़ी संख्या में नागरिक उनसे परिचित थे और वह भी उनके लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे। देर रात भ्रमण करके लौटते तो शिविर कार्यालय में मिलने वालों का तांता लगा होता।
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सेवानिवृत्त आईपीएस बीबी बख्शी
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कुछ ही लोग शिकायत या समस्या लेकर आते थे, जबकि अपराधियों और पुलिसकर्मियों की गतिविधियों की जानकारी देने वालों की खासी तादात होती थी। बीबी बख्शी के लंबे कार्यकाल में अनेक संगीन वारदात हुईं, लेकिन मुखबिर तंत्र मजबूत होने से वह जल्द ही बदमाशों का सुराग लगा लेते थे।
नागरिकों की मदद और सुरक्षा
बीबी बख्शी को पता रहता था कि उनके सामने शिकायत लेकर आया व्यक्ति कितना सच बोल रहा है? संभ्रांत नागरिकों की बेहिचक मदद करते थे। नागरिकों की सुरक्षा के लिए रात्रि गश्त व बीट पुलिसिंग को मजबूत किया। कप्तान को सुबह से लेकर देर रात तक जनसुनवाई करते देख अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी भी सक्रिय रहते थे। किसी पीड़ित को थाने से टरकाए जाने की खबर पर उनका पारा चढ़ता और पुलिसकर्मियों को दंडित करते थे।