फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

औचक निरीक्षण को ऑटो से निकलते थे ये डीजीपी, छेड़खानी की शिकायत मिलने पर खुद जाते पहुंच

Thu, 26 Jul 2018 04:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 26 Jul 2018 04:49 PM IST
विज्ञापन
achievements of DGP vikram singh
डीजीपी विक्रम सिंह - फोटो : amarujala

लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें विक्रम सिंह की अपनी अलग पहचान है। कप्तानी से लेकर डीजीपी बनने तक जनता की सुनवाई और घटनास्थल पर पहुंचने में कभी कोताही नहीं की। 

achievements of DGP vikram singh
डीजीपी - फोटो : amarujala
प्रदेश में बढ़े अपराध के ग्राफ और कानून व्यवस्था की बदहाली के दौरान पुलिस महानिदेशक बने विक्रम सिंह ने किसी भी जिले में संगीन वारदात होने पर बदमाशों के पकड़े जाने तक कप्तान को मौके पर डटे रहने के आदेश जारी किए। प्रत्येक शुक्रवार की परेड में सिपाहियों के साथ पुलिस अधिकारियों को भी पुलिस लाइन ग्राउंड के चक्कर लगाने पड़ते थे। 
achievements of DGP vikram singh
डेमो - फोटो : डेमो
अपराध व कानून व्यवस्था में कुछ सुधार होते ही उन्होंने थानों के औचक निरीक्षण शुरू किए। विक्रम सिंह के औचक निरीक्षण का तरीका अलग ही था। लावलश्कर के साथ वातानुकूलित कार नहीं, बल्कि सादे कपड़ों में ऑटो पर सवार होकर निकलते थे। कानपुर व मेरठ में थानों के औचक निरीक्षण के बाद थानेदार से लेकर कप्तान तक हर दम मुस्तैद रहने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
achievements of DGP vikram singh
डेमो
चौराहों पर ट्रकों से वसूली करने वाले पुलिसकर्मियों को डर बना रहता था कि उसमें कहीं डीजीपी तो नहीं सवार हैं। महिलाओं से छेड़खानी की शिकायत पर न सिर्फ संजीदगी से कार्रवाई कराते थे, बल्कि जिस स्थान पर छेड़खानी की अधिक शिकायत आती थी। वहां खुद जा धमकते थे और शोहदों की धरपकड़ कराकर ही लौटते थे। 
विज्ञापन
achievements of DGP vikram singh
डीजीपी विक्रम सिंह - फोटो : amarujala
जन सुनवाई को खास तवज्जो 
नागरिकों की शिकायतों की सुनवाई के लिए सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह के कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है। सुबह नौ बजे से ही शिकायतों की सुनवाई शुरू कर देते थे। मातहत अधिकारियों को हिदायत थी कि उनकी गैर मौजूदगी में कोई पीड़ित व्यक्ति मायूस न लौटे। खाली समय में शिकायतकर्ता को फोन करके उसकी शिकायत पर हुई कार्रवाई का जायजा लेते और लापरवाह पुलिसकर्मी पर कार्रवाई होती थी।  
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed