खाने की नली में चार दिन फंसा रहा ढाई इंच चौड़ा लॉकेट, तस्वीरें
लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय के डॉक्टरों ने बुधवार को आठ साल एक मासूम के खाने की नली से लॉकेट निकालकर उसकी जान बचाई। मासूम के खाने की नली में बीते छह दिसंबर से लॉकेट फंसा हुआ था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। चौथे दिन 9 दिसंबर को जब उसकी हालत खराब होने लगी तो परिवारीजन उसे लोकबंधु अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने तुरंत एक्सरे कराया तो पता चला कि खाने की नली में ढाई इंच चौड़ा लॉकेट अटका है। डॉक्टरों ने बुधवार को तीन घंटे में लॉकेट बाहर निकाल कर बच्चे की जान बचाई।
खाने की नली में चार दिन फंसा रहा ढाई इंच चौड़ा लॉकेट, तस्वीरें
सरोजनीनगर के नीरज सिंह का आठ साल का बेटा ओम सिंह (8) छह दिसंबर को घर के बाहर खेल रहा था। तभी ओम पीछे से आ रहे बंदर को देख भागने लगा और गले में लटका लॉकेट झटके के साथ मुंह में चला गया और फिर खाने की नली में फंस गया। लॉकेट फंसने से वो कुछ बता नहीं पा रहा था और रोए जा रहा था।
खाने की नली में चार दिन फंसा रहा ढाई इंच चौड़ा लॉकेट, तस्वीरें
चार दिन तक अनजान रहे घर के लोग
छह दिसंबर को लॉकेट फंसने के बाद सात दिसंबर की सुबह दर्द बढ़ा तो परिवारीजन कुछ समझ नहीं पाए और बच्चे को बहला-फुसलाकर चुप कराते रहे। आठ दिसंबर को भी मासूम कुछ बोल नहीं पा रहा था और दर्द से परेशान था। नौ दिसंबर की गला सूज गया और चेहरा लाल होने लगा तो परिवारीजन ओम को लेकर लोकबंधु चिकित्सालय पहुंचे। वहां ईएनटी विभाग के डॉ. मेवा लाल ने तुरंत एक्स-रे कराने की सलाह दी। जांच में पता चला कि गले में करीब ढाई इंच चौड़ा लॉकेट फंसा हुआ है।
खाने की नली में चार दिन फंसा रहा ढाई इंच चौड़ा लॉकेट, तस्वीरें
धरती के भगवान ने बचाई जान
डॉ. एम लाल ने बताया कि नौ बजे एक्स-रे और अन्य जांचे कराने के बाद दोपहर 12 बजे लॉकेट निकालने का काम शुरू किया गया। बेहोशी के बाद इसोफेगस स्कोप और फोरसेप मेटैलिक वायर की मदद से खाने की नली में फंसा लॉकेट निकालने में करीब ढाई घंटा लग गया। उनका कहना था कि लॉकेट खाने की नली में फंसा था। नली में थोड़ी सी भी जगह नहीं थी जिससे लॉकेट आगे पीछे हो सके। इस वजह से गले में फंसा लॉकेट को निकालना बहुत कठिन था। दूसरी नसों और कोशिकाओं को बिना नुकसान किए गले में फंसे लॉकेट को निकाल दिया गया और अब बच्चा पूरी तरह ठीक है।
खाने की नली में चार दिन फंसा रहा ढाई इंच चौड़ा लॉकेट, तस्वीरें
ओम के गले में सांस नली के ऊपर क्राइको-पायरिंस हिस्से में लॉकेट फंसा था। इससे उसे खाने में दिक्कत हो रही थी और असहनीय दर्द हो रहा था। एक्सरे में लॉकेट दिखा तो इसोफेगस स्कोप डालकर गले में फंसे लॉकेट की क्लीयर पोजीशन दिखने लगी। इसके बाद एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. एसएम खान, डॉ. मेहता और स्टाफ नर्स मीरा की टीम बनाई गई। डॉ. एम लाल ने बताया कि इंडोट्रेक्यिल ट्यूब की मदद से बच्चे को बेहोश किया गया। इसोफेगस स्कोप की मदद से लंबी मेटॉलिक प्रोसेप वायर डाला गया और गले में फंसे लॉकेट को निकाल दिया गया। लॉकेट का आकार इतना बड़ा था कि वो आहार नली से पेट में नहीं जा सकता था जिससे वो वेस्ट के साथ बाहर आ सके।