लॉकडाउन के दौरान बढ़े घरेलू हिंसा के मामले, एक्सपर्ट बोले- न काम है न शराब मिल रही
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एक तरफ लॉकडाउन ने पति-पत्नी के बीच की दूरियों को कम किया है तो दूसरी तरफ कुछ नासमझ जोड़ों के बीच दूरियां भी बढ़ा दी है। पति-पत्नी के जिन मामलों को वन स्टाप सेंटर लखनऊ ने सुलझा लिया था, उनमें मारपीट दोबारा शुरू होने की शिकायतें एकदम से बढ़ गईं। पूर्व में सुलझाए गए 1738 मामलों में से 534 मामलों में दोबारा हिंसा शुरू होने का सच सामने आया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने इन सभी मामलों की दोबारा ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू करने का निर्देश दिया है।
हालात कितने गंभीर, शिकायतों से समझिए
केस-1: सुबह से झगड़ा, शाम को मारपीट
आशियाना निवासी पीड़िता का पति मर्चेंट नेवी में है। पीड़िता ने वन स्टाफ सेंटर को फोन पर बताया कि पति छुट्टी पर आए थे। लॉकडाउन के कारण जाना नहीं हुआ। सारा दिन घर में टोका-टोकी चलती है। दिनभर काम के बीच झगड़ा खीझ पैदा करता है। कुछ बोल दो तो पति पीटने लगता है। हमें मदद चाहिए।
केस-2: पति छोड़कर चला गया
कृष्णानगर निवासी पीड़िता ने वन स्टाफ सेंटर को फोन कर बताया कि लॉकडाउन के दौरान पति ने शुरू के एक दो दिन तो झगड़ा किया, पीटा और अब छोड़ कर चला गया। ढूंढने की कोशिश की, लेकिन पता नहीं चला। हम परेशान हैं, क्या करें समझ नहीं पा रहे हैं।
58 पीड़िताओं ने की शिकायत
वन स्टाफ सेंटर लखनऊ में तीन वर्षों में 2340 केस घरेलू हिंसा के आए, जिसमें 1738 को काउंसलिंग से सुलझा लिया गया। सुलझ चुके मामलों में से 58 पीड़िताओं ने फोन कर बताया कि लॉकडाउन में पति घर पर हैं और दिनभर झगड़ा करते हैं और बात-बात में पीट देते हैं। इसके बाद सेंटर ने खुद ही सभी सुलझे हुए मुकदमों का फॉलोअप लिया तो 476 और मामलों में मारपीट दोबारा शुरू होने का सच सामने आया। इनमें मध्यमवर्गीय परिवार के लोग भी हैं और हाई क्लास सोसाइटी की पीड़िताएं भी शामिल हैं।
न काम है न शराब मिल रही
वन स्टाफ सेंटर की प्रभारी अर्चना सिंह कहती हैं कि महिलाओं से हिंसा का कारण पूछने पर पता चलता है कि पति बेरोजगार है। पैसे का अभाव है। पहले नशा आसानी से करने को मिल जाता था, अब शराब नहीं मिल रही। महिलाएं कहती हैं कि इसका तनाव वे हमारे ऊपर निकाल रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर लड़ना चाहते हैं, उसे मुद्दा बना लेते हैं।
वर्चुअल काउंसिलंग के मॉडल पर कर रहे काम
जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय ने बताया कि एक काउंसलिंग टीम का गठन किया गया है। यह टीम लगातार फॉलोअप लेगी और एप व वीडियो कॉल के लिए मुफीद सभी साधनों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों से बात करेगी और उनकी काउंसिलंग करेगी। हम लगातार फॉलोअप ले रहे हैं ताकि मामले सामने आएं और इन्हें रोकना संभव हो। काउंसलिंग टीम बुधवार से सक्रिय हो गई। जरूरत पर तुरंत 112 की मदद ली जाएगी।