आजमगढ़ निवासी लाल बिहारी मृतक को चार यमदूत अर्थी पर बैठाकर केक के पास लाए। उनमें प्राण फूंके और फिर मृतक ने उठकर केक काटा। यह नजारा था रविवार को मृतक लाल बिहारी के 25वें पुनर्जन्म दिवस समारोह का। 25 साल पहले सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित किए जा चुके लाल बिहारी आज भी जिवित हैं, और हर साल इसी तरह से अपना पुनर्जन्म दिवस मनाते हैं। कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि यह उनके विरोध प्रदर्शन का तरीका है। इस दौरान सरकारी कागजों में मृत घोषित किए गए अन्य नागरिकों के साथ जाने-माने फिल्मकार सतीश कौशिक भी उपस्थित रहे। सतीश लाल बिहारी के जीवन पर फिल्म बना रहे हैं।
मरने के बाद क्या कोई केक काटकर मना सकता है जन्मदिन, जानें- क्या है सच
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64 साल के लाल बिहारी ने बताया कि सरकारी अधिकारियों ने 1976 में दस्तावेजों में उन्हें मार दिया था। जमीन के विवाद में उन्हें आजमगढ़ में सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया था। इसके खिलाफ लंबी लड़ाई लड़कर 30 जून 1994 को लाल बिहारी ने खुद को जीवित साबित करवाया था। इसी तारीख को उन्हाेंने अपना पुनर्जन्म दिवस मान लिया।
करीब दो दशक झेली त्रासदी के लिए लाल बिहारी ने प्रदेश सरकार पर 20 करोड़ रुपये मुआवजे का केस भी हाईकोर्ट में किया है। उनके वकील कृष्ण कन्हैया ने बताया कि हाईकोर्ट ने सरकार से मुआवजा देने के विषय में पूछा था। बाद में सामने आया कि उनके मामले के सरकारी दस्तावेज ही गायब कर दिए गए हैं। फिलहाल इसकी जांच की जा रही है।
देश में 20 हजार जिंदा मृतक
लाल बिहारी ने बताया कि देश में उनके जैसे करीब 20 हजार जिंदा मृतक हैं। इनके मामले वे कोर्ट से लेकर सरकारी विभागों तक में उठा रहे हैं। सरकारी तंत्र उन्हें नकारने की पूरी कोशिश करता है। कुछ समय पहले मानवाधिकार आयोग ने मृत घोषित 1500 नागरिकों को वापस जीवित करने के आदेश विभिन्न राज्य सरकारों को दिए थे, लेकिन 566 को ही कागजों में जीवित किया गया। लाल बिहारी के अनुसार यह संघर्ष लंबा चलेगा और इसके लिए वे तैयार हैं। उन्हाेंने अपना उपनाम ‘मृतक’ लिखना शुरू कर दिया है, मृतक संघ बनाकर ऐसे लोगों की मदद भी कर रहे हैं।
मृतकों की कहानी : जमीन बनी जान की दुश्मन
जमुना प्रसाद, आजमगढ़
कागजों में मृत घोषित हो चुके जमुना प्रसाद ने बताया कि वे कानपुर में पान की दुकान चलाते थे। उनके भाई बंजू ने साढ़े चार बीघा जमीन के लिए 1991 में उन्हें मृत घोषित करवा दिया। आजमगढ़ में उनका नाम परिवार रजिस्टर से यह कहकर हटवा दिया गया कि उनके पिता की एक ही संतान जीवित है। पिछले 28 साल से खुद को कागजों में जीवित करवाने के लिए जमुना का संघर्ष जारी है। वे बताते हैं कि इसके लिए उनका भाई उनसे ढाई लाख रुपये की मांग कर रहा है।