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हाथियों को नहीं भा रही नेपाल की आबोहवा, ढाई साल में यूपी में बढ़ गई संख्या, माना जा रहा अच्छा संकेत
Wed, 24 Jun 2020 12:01 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 24 Jun 2020 12:01 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अब हाथियों को नेपाल की आबोहवा नहीं भा रही है। करीब ढाई साल में उत्तर प्रदेश में हाथियों की संख्या में 120 की वृद्धि हुई है। नेपाल और उत्तराखंड से सटे यूपी के जंगलों में इनकी संख्या बढ़कर 352 हो गई है। इसे जंगल, पर्यावरण और वन्यजीवों के लिहाज से अच्छा संकेत माना जा रहा है।
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- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश में फॉरेस्ट कवर बढ़ने के बाद यह एक और अच्छी खबर आई है। 6, 7 व 8 जून को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में एक साथ हाथियों की गणना की गई थी। इसके पीछे की मंशा यह रही कि एक ही हाथी दोनों जगह न गिन लिया जाएं। वन एवं वन्य जीव विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल से सटे दुधवा और कतर्नियाघाट के जंगलों में 149 हाथी पाए गए।
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उत्तराखंड से लगे शिवालिक के जंगलों में 18, अमानगढ़ में 82 और नजीबाबाद (बिजनौर) में 103 हाथी मिले। इस तरह से इनकी कुछ संख्या 352 निकलकर आई। इससे पहले वर्ष 2017 में हुई गणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हाथियों की संख्या 232 थी। वन एवं वन्य जीव विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पाए जाने वाले हाथी सामान्यत: प्रवासी (माइग्रेट्री) होते हैं। वे नेपाल या उत्तराखंड से यूपी में आते हैं।
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पहले हाथी गन्ने के सीजन में दो-चार महीने आकर वापस लौट जाते थे, पर इधर कुछ वर्षों से वे यूपी में ज्यादा रुक रहे हैं। नेपाल से सटे यूपी के जंगलों में अच्छी-खासी संख्या में ऐसे हाथी हैं, जो अब नेपाल नहीं लौट रहे हैं। इसकी वजह भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल की ओर सड़क का बनना और जंगलों का बड़े पैमाने पर सफाया माना जा रहा है। इसलिए नेपाल से सटे दुधवा और कतर्नियाघाट में इनकी संख्या अच्छी-खासी है।
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ऐसे होती है गणना
हाथियों को एक दिन में न्यूनतम 200 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। गणना का समय गर्मियों में रखा जाता है, जब पानी के स्थान सीमित होते हैं। जंगल में बड़े जलाशयों पर हाथी दिन में एक बार जरूर आते हैं। इसलिए इन्हीं जलाशयों के नजदीक वन विभाग की टीम गणना के लिए मौजूद रहती है।
हाथियों को एक दिन में न्यूनतम 200 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। गणना का समय गर्मियों में रखा जाता है, जब पानी के स्थान सीमित होते हैं। जंगल में बड़े जलाशयों पर हाथी दिन में एक बार जरूर आते हैं। इसलिए इन्हीं जलाशयों के नजदीक वन विभाग की टीम गणना के लिए मौजूद रहती है।