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रोज योग नहीं कर पाते? हफ्ते में सिर्फ 3-4 दिन करने से भी मिलेंगे ये बड़े फायदे!

Sat, 29 Aug 2026 11:55 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sat, 29 Aug 2026 11:55 AM IST
सार

Daily Yoga vs Yoga 3-4 Days a Week: अगर किसी व्यक्ति के पास रोज 45-60 मिनट निकालने का समय नहीं है, तो सप्ताह में तीन या चार दिन योग करना भी एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है। 

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How Many Days a Week Should You Do Yoga? Daily vs 3-4 Days Explained
योग कितने दिन करें - फोटो : AI
क्या योग का फायदा तभी मिलेगा, जब आप इसे नियमित करें? या फिर हफ्ते में सिर्फ तीन-चार दिन योगासन करने से भी शरीर और मन को इसका लाभ मिल सकता है? यह सवाल उन तमाम लोगों के मन में रहता है, जो व्यस्त दिनचर्या के बीच योग को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहते हैं। कई लोग एक-दो दिन अभ्यास छूट जाने पर मान लेते हैं कि उनकी पूरी मेहनत बेकार हो गई, हालांकि ऐसा होता नहीं है। वहीं कुछ लोगों का ये भी मानना है कि रोज तो योग करते ही हैं, अगर कुछ दिन छूट भी जाए तो क्या ही फर्क पड़ेगा।


योग का असर केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने कितने दिन लगातार आसन किए। आपकी नियमितता, अभ्यास की अवधि, योग का प्रकार और आपकी शारीरिक स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ शोध में योग को तनाव कम करने, जीवन की गुणवत्ता और कुछ शारीरिक क्षमताओं में सुधार से जोड़ा गया है। 

एक हालिया प्रकाशित समीक्षा में नियमित योग अभ्यास से जुड़े बेहतर मानसिक स्वास्थ्य परिणामों के संकेत मिले और कुछ अध्ययनों में सप्ताह में 3-4 दिन अभ्यास करने वाले प्रतिभागियों में बेहतर परिणाम देखे गए। हालांकि शोध की सीमाओं को देखते हुए इसे हर व्यक्ति के लिए तय नियम नहीं माना जा सकता। 

तो क्या रोज योग करना जरूरी है? क्या दो-तीन दिन का गैप नुकसान करता है? और हफ्ते में तीन-चार दिन योग करने से आखिर कितना फायदा मिल सकता है? आइए समझते हैं।
 
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योग के दौरान इन गलतियों से बचें - फोटो : Ai

क्या रोज योग करना जरूरी है?

योग को प्रभावी बनाने के लिए रोज अभ्यास करना अनिवार्य नियम नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि अभ्यास लंबे समय तक नियमित बना रहे। WHO की शारीरिक गतिविधि संबंधी गाइडलाइंस भी पूरे सप्ताह नियमित शारीरिक गतिविधि पर जोर देती हैं, न कि हर व्यक्ति के लिए रोज एक ही तरह का व्यायाम अनिवार्य करती हैं। 

इसलिए अगर किसी व्यक्ति के पास रोज 45-60 मिनट निकालने का समय नहीं है, तो सप्ताह में तीन या चार दिन योग करना भी एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है। योग के साथ पैदल चलना, अन्य शारीरिक गतिविधियां और पर्याप्त आराम को दिनचर्या में शामिल करना भी उपयोगी है।

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माइग्रेन के लिए योग - फोटो : AI

हफ्ते में 3-4 दिन योगासन करने से क्या असर होगा?

हफ्ते में तीन-चार दिन योग करने से शरीर को नियमित मूवमेंट मिलता रहता है। अलग-अलग अध्ययनों में योग को लचीलेपन, संतुलन, मांसपेशियों की क्षमता और कुछ मानसिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार से जोड़ा गया है। विशेष रूप से उम्रदराज लोगों पर किए गए एक व्यवस्थित विश्लेषण में संतुलन, लचीलेपन और मांसपेशियों की ताकत में सुधार के संकेत मिले। 

हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को बिल्कुल समान परिणाम मिलेंगे। योग का प्रकार, आसनों की कठिनाई, अभ्यास की अवधि, उम्र, फिटनेस स्तर और स्वास्थ्य स्थिति परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

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Yoga for Digestion - फोटो : AI

बीच में कभी-कभी योग छूट जाए तो क्या होगा?

अगर किसी दिन या कुछ दिनों के लिए योग छूट जाए तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं है। एक-दो दिन का ब्रेक आपकी अब तक की पूरी मेहनत को अचानक खत्म नहीं कर देता। असली समस्या तब पैदा होती है, जब कभी-कभार का ब्रेक धीरे-धीरे लंबे अंतराल में बदल जाए और अभ्यास पूरी तरह बंद हो जाए।

इसे 'ऑल-ऑर-नथिंग' नजरिए से देखने के बजाय निरंतरता पर ध्यान देना बेहतर है। किसी दिन समय कम हो तो लंबा सेशन करने की बजाय हल्के स्ट्रेचिंग, श्वास अभ्यास या थोड़े समय का आसान योग किया जा सकता है, बशर्ते वह आपकी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुरूप हो।

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माहिका शर्मा की फिटनेट का राज हैं ये योगास - फोटो : Instagram

योग तनाव और मानसिक सुकून में भी मदद कर सकता है

योग को केवल शरीर मोड़ने वाले आसनों तक सीमित समझना सही नहीं है। आसन, सांस से जुड़े अभ्यास और विश्राम/ध्यान जैसी तकनीकें मिलकर मन-शरीर पर असर डाल सकती हैं। हालिया व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में तनावग्रस्त वयस्कों में योग से अल्पकालिक तनाव में कमी और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के संकेत मिले, हालांकि शोध की गुणवत्ता और अध्ययन पद्धतियों में कुछ सीमाएं थीं। 

यही कारण है कि कई लोगों के लिए योग का सबसे बड़ा फायदा केवल लचीलापन बढ़ना नहीं, बल्कि दिनचर्या में एक शांत और नियमित समय बनना भी हो सकता है।

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