उम्र बढ़ना सामान्य प्रक्रिया है, इसके साथ शरीर में कई तरह के बदलाव भी आने शुरू हो जाते हैं। 50-55 की उम्र के बाद शरीर की मांसपेशियां कम होने लगती हैं, ताकत घटने लगती है और आपके लिए जीवन के सामान्य कामकाज करना भी मुश्किल हो जाता है। महिलाओं में 50 की उम्र के बाद मेनोपॉज के कारण होने वाली समस्याओं का खतरा और भी बढ़ जाता है।
ब्रेन हेल्थ: दिमाग के बूढ़ा होने से पहले ही दिखने लगते हैं ये संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज
दिमाग की उम्र बढ़ने का असर केवल याददाश्त कमजोर होने से नहीं दिखता। सही शब्द खोजने, चीजें समझने, फैसला लेने, रोजमर्रा के काम करने और व्यवहार में बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। लगातार ऐसे बदलाव दिखाई दें तो उन्हें सिर्फ उम्र का असर मानने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
ब्रेन हेल्थ की समस्याएं
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग के अनुसार, याददाश्त में परेशानी को आमतौर पर अल्जाइमर-डिमेंशिया जैसी बीमारी के शुरुआती संकेतों के तौर पर जाना जाता है। लेकिन केवल चीजों के भूलने से यह साबित नहीं होता कि आपको डिमेंशिया हो गया है।
- ब्रेन हेल्थ को केवल याददाश्त कम होने की दिक्कत से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। शरीर और व्यवहार में आने वाले कई बदलाव भी दिमाग की स्थिति के बारे में पहले से संकेत दे सकते हैं। समय रहते इन्हें पहचानना जरूरी है।
- कुछ स्थितियों में समय पर डॉक्टरी मदद आपकी दिक्कतों को बढ़ने से बचाने में मददगार हो सकती है।
क्या आपकी याददाश्त हो रही है कमजोर?
कभी-कभार नाम या कोई छोटी बात भूल जाना आमतौर पर सामान्य माना जाता है, ये दिक्कत बच्चों-किशोरों में भी हो सकती है। हालांकि अगर भूलने की समस्या बार-बार होने लगे और इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगें तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एक ही सवाल बार-बार पूछना, हाल में हुई महत्वपूर्ण घटनाओं को याद न कर पाना ऐसे संकेत हैं जिनपर कम उम्र से भी ध्यान देना चाहिए। 40 से कम उम्र में ये दिक्कतें हो रही हैं तो तुरंत डॉक्टरी मदद लें।
बात को समझने के लिए करनी पड़ती है ज्यादा मेहनत?
- ब्रेन हेल्थ में बदलावों को सिर्फ याददाश्त में कमी से नहीं समझा जा सकता। यदि बातचीत करते समय सामान्य शब्द न मिलें, किसी बात को समझने में पहले से ज्यादा परेशानी होने लगे, चीजों की दिशा या जगह समझने में दिक्कत हो और सही फैसला लेने की क्षमता में कमी आ रही हो तो अलर्ट हो जाएं। अगर ये बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
पहले जैसा काम करना हो गया है मुश्किल
- जिस काम को आप लंबे समय से आसानी से करते आ रहे हों, उसमें अचानक परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रोजमर्रा के काम में बार-बार भ्रम, काम पूरा करने में कठिनाई या पहले से सीखी चीजों को करने में दिक्कत होना संज्ञानात्मक क्षमता में बदलाव का संकेत हो सकता है।
- संज्ञानात्मक क्षमता यानी चीजों को याद रखने, समझने, सोचने और फैसला लेने की दिमागी क्षमता में कमी के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें समय रहते डॉक्टरी मदद आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है।
व्यवहार में बदलाव तो नहीं?
दिमाग में होने वाले बदलाव केवल चीजों के भूलने तक सीमित नहीं होते। कई बार इससे आपमें भ्रम बढ़ने और व्यवहार में बदलाव जैसी समस्या आने का भी खतरा हो सकता है।
अगर आपको लगता है कि परिवार में किसी के व्यवहार में अचानक बदलाव आ गया है, वह लंबे समय तक सोचता रहता है, चीजों को पहले जैसे समझने में दिक्कत हो रही है तो इसपर तुरंत डॉक्टरी मदद लें। कई बार कम उम्र में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी ऐसी दिक्कतें हो सकती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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