यूं तो आपने कई मेले देखे होंगे, जहां रंग-बिरंगे झालरों की सजावट, गुब्बारे, बड़े-बड़े झूले और बहुत कुछ होता है। लेकिन भारत में एक मेला ऐसा भी लगता है जहां लोग खुद अपने जीवनसाथी को चुनते हैं। हालांकि, जानकर हैरानी जरूर होगी लेकिन ये परंपरा आज भी जारी है। अगर आप भी इस परंपरा को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं तो चलिए हम आपको रास्ते और वहां होने वाली बाकी चीजों की जानकारी देंगे।
इस मेले का आयोजन गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में थानगढ़ के पास तरणेतर में होता है। जहां आदिवासी युवक और युवतियां सज-धज कर जाते हैं और अपना जीवनसाथी चुनते हैं। माना जाता है कि महाभारत काल से ही इस मेले का आयोजन होता आ रहा है और यह अर्जुन और द्रौपदी के स्वयंवर की परंपरा से जुड़ा हुआ है। युवक पारंपरिक कपड़े पहन खुद की बनाई हुई रंगबिरंगी छतरियों के नीचे बैठते हैं और युवतियों का इंतजार करते हैं।
यहां गुजरात के अलग-अलग इलाकों के पारंपरिक कपड़ों की प्रदर्शनी लगती है। चार दिनों तक चलने वाला यह मेला ऐतिहासिक त्रिनेश्वर मंदिर आसपास लगता है। मंदिर के पास स्थित तालाब में स्नान करने के लिए काफी भीड़ रहती है। मान्यता है कि इसमें स्नान करने से गंगा नदी में स्नान करने जैसा पुण्य मिलता है। इस साल यह मेला 01 सितंबर से शुरू होकर 04 सितंबर तक चलने वाला है।
इस स्थान से राजकोट एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। राजकोट के लिए अहमदाबाद और मुंबई से हवाई सेवा उपलब्ध है। मेला स्थल से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन थानगढ़ है, जो आठ किमी की दूरी पर है। यह रेलवे स्टेशन अहमदाबाद-राजकोट रेल लाइन से भी जुड़ा हुआ है। राजकोट से तरणेतर की दूरी 75 किलोमिटर है, जबकि अहमदाबाद से 215 किलोमिटर है। राज्य परिवहन की बस सेवा से यहां पहुंचा जा सकता है।