दिल्ली में भी मौजूद है बनारस जैसा 'घाट', इस वीकेंड बना लें यहां का प्लान
यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है निगमबोध घाट। इस घाट पर लोग स्नान करने और बहुत से कर्मकांड करने आते हैं। दिल्ली का ये सबसे पुराना घाट है।
कलकल बहता पानी और पक्षियों के कोलाहल के बीच कुछ देर शांति से बैठने के लिए पूरी दिल्ली में इससे बेहतरीन जगह दूसरी नहीं है। हर साल सर्दियों के शुरू होते ही सुदूर सर्बिया और रूस के पक्षी मेहमान बनकर यहां आते हैं। इन पक्षियों को देखना और यहां के विहंगम दृश्य को तस्वीरों के रूप में सहेजना एक अलग ही अनुभव देता है।
अगर आप समय निकाल कर इस घाट की सुंदरता देखने गए हैं तो आपको निराशा नहीं होगी क्योंकि सबसे पहले तो ये घाट बहुत ही साफ-सुधरा है और दूसरा यहां पर अत्यंत प्राचीन मंदिर, जिसे महाराज युधिष्ठिर ने महाभारत काल में बनवाया था मौजूद है। इस मंदिर का नाम नीली छतरी है। इसके साथ ही आपको यहां पर ब्रिटिश काल की कुछ इमारतें भी नजर आ जाएंगी। यहां पर यमुना नदी में बोटिंग का भी लुत्फ लिया जा सकता है।
निगमबोध घाट केवल अपनी सुंदरता के लिहाज से ही नहीं खास है। इस घाट की मान्यता अत्यंत प्राचीन काल से है। कहते हैं महाभारत काल में जब ब्रह्मा धरती पर आए तो उन्होंने इसी घाट पर स्नान किया था।