डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के जन्मदिवस पर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के योगदान को दर्शाता है। किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए शिष्य के जीवन में शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आज हम जानेंगे, ऐसे ही राजनीतिक गुरुओं के बारे में जिनके शिष्यों ने राजनीति के क्षेत्र में अपना एक अलग मुकाम हासिल किया और देश के राजनीतिक गलियारे में मुख्यमंत्री पद से लेकर केंद्रीय मंत्री तक बने। तो चलिए जानते हैं...
Teachers day 2020: जानिए उन राजनीतिक गुरुओं के बारे में, जिनके शिष्यों में कोई बना मुख्यमंत्री तो कोई केंद्रीय मंत्री
जय प्रकाश नारायण
जय प्रकाश नारायण, जिनको ज्यादातर लोग जेपी के नाम से जानते हैं। भारतीय राजनीति में इनकी एक अलग पहचान और मान है। इनके क्रांति आंदोलन से कई नेता निकले, जिन्होंने भारत की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। नीतीश कुमार जो इस समय बिहार के मुख्यमंत्री हैं, तो वहीं लालू प्रसाद यादव भी इस पद को संभाल चुके हैं। वहीं रविशंकर प्रसाद पूर्व केंद्रीय मंत्री पद समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। इस समय वे ऊपरी सदन में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस लिस्ट में मुलायम सिंह यादव और मुख्तार अब्बास नकवी जैसे दिग्गज नेताओं के नाम भी शामिल हैं।
क्रांतिकारी अन्ना हजारे गांधीवादी विचार की धारा रखते हैं। उन्होंने देशहित के लिए कई आंदोलन किए, लेकिन राजनीति से हमेशा दूर रहे। लेकिन उनके शिष्य आज देश की राजनीति में बड़ा नाम हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन्हीं को अपना गुरु मानते हैं। तो वहीं मनीष मनीष सिसौदिया हो या पूर्व सैन्य जनरल वीके सिंह ये सभी अन्ना हजारे के शिष्य रह चुके हैं।
राम मनोहर लोहिया
राम मनोहर लोहिया भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ और प्रखर समाजवादी नेता थे। उन्होंने ने ही गैर कांग्रेसवादी की नई सोच की अलख जलाई। राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आने के बाद ही यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके मुलायम सिंह यादव ने राजनीति का रुख किया था।
एमजी रामचंद्रन
एमजी रामचंद्रन दक्षिण भारत की राजनीति का एक बड़ा नाम और दिग्गज नेता रहे हैं। इन्होंने अपनी खुद की पार्टी बनाई और एक नया मुकाम हासिल किया। ये फिल्मी जगत छोड़कर राजनीति में आए। जिसके बाद ये अपनीइ शिष्य मशहूर अभिनेत्री जयलिलता को भी राजनीति में लाए। जयलिलता को तमिलनाडू में लोग आज भी आदर के साथ अम्मा के नाम से जानते हैं। इन्होंने दशकों तक तमिलनाडू की राजनीति में अपना लोहा मनवाया था।